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एस-400 डील पर लगी मुहर, लेकिन भुगतान को लेकर अब भी है पेच

नई दिल्ली भारत और रूस ने पिछले दो दशक की सबसे बड़ी डिफेंस डील एस-400 सर्फेस-टु-एयर मिसाइल सिस्टम पर मुहर लगाई है। लेकिन अब दोनों देशों के बीच सबसे बड़ी चुनौती पैसे के ट्रांसफर की है। रूस अमेरिका द्वारा प्रतिबंध का सामना कर रहा है। ऐसे में कॉन्ट्रैक्ट के लिए 5.43 बिलियन डॉलर के ट्रांसफर को लेकर चुनौती बनी हुई है। बताया जा रहा है कि जिस एस-400 का प्रॉडक्शन करने वाली कंपनी भी अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रही है। ऐसे में इस डील के लिए भले ही अमेरिका भारत को छूट दे दे, लेकिन प्रॉडक्शन कंपनी पर लगे प्रतिबंध की वजह से बैंकिंग लेनदेन काफी मुश्किल होगा। लंबे समय से प्रस्तावित डील पर मुहर लगने की खबर शुक्रवार को पीएम मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दी। रूस पर अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंध और भारत को अमेरिका की लगातार चेतावनी के बावजूद भारत द्वारा इस डील पर मुहर लगाना काफी अहम है। एस-400 चीन और पाक बॉर्डर पर सेना की ताकत बढ़ाएगी।

यह डील इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गई थी क्योंकि चीन ने जनवरी में 6 एस-400 मिसाइल तैनात की थी। चीन और रूस के बीच यह डील 2014 में हुई थी। इस डील के लिए अमेरिका ने चीन पर प्रतिबंध लगाया है, लेकिन भारत को उम्मीद है कि उसे इसमें ट्रंप प्रशासन द्वारा कुछ छूट मिल सकती है। उम्मीद जताई जा रही है कि भारत को इन सिस्टम की डिलीवरी 2020 में होगी। चीन को इसकी डिलीवरी पहले ही हो चुकी है, ऐसे में चीन की तरफ से इस मोर्चे पर भारत काफी खतरा था। काफी लंबी बातचीत के बाद जहां अब डील फाइनल हो गई है, वहीं अब भारत के सामने रूस को पैसा ट्रांसफर करने को लेकर सबसे बड़ी चुनौती होगी। जानकारों का कहना है कि डील साइन होने के बाद फॉरेन सप्लायर को प्रॉडक्शन चालू करने के लिए 15 प्रतिशत अडवांस में दिया जाएगा। एस-400 के मामले में बात करें तो इसे मैन्युफैक्चरर अलमाज-ऐंटी अमेरिकी प्रतिबंधों की लिस्ट में है, जिसकी वजह से इस पर बैंकिंग लेनदेन पर रोक लगी है। भले ही भारत को इस डील में अमेरिका की तरफ से रियायत मिल जाए, लेकिन इसके बावजूद भी प्रॉडक्शन कंपनी पर लगा प्रतिबंध इस डील के आड़े आएगा। दोनों देशों के बीच इस डील लिए बैंकिंग लेनदेन को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ेगा। यहां तक कि रूस के साथ पूर्व में की गई डील के लिए भी पेमेंट फिलहाल रूकी हुई है। मामले की जानकारी रखने वालों का कहना है कि अमेरिका द्वारा रूस पर प्रतिबंध से पहले ही एस-400 को लेकर बात चल रही है। नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास ने भारत को मिलने वाली छूट को लेकर अभी तक कोई वादा नहीं किया है।

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