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वीपीएन कंपनियों को मंज़ूर नहीं भारत की नई पॉलिसी, कहा- नियमों में बदलाव नहीं हुए तो समेट लेंगे कारोबार

नई दिल्ली ,७ मई । वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क के साथ सुरक्षा को लेकर भारत सरकार ने अपने एक फैसले में कहा है कि वीपीएन कंपनियों को यूजर्स का डाटा ५ सालों तक सुरक्षित रखना होगा और जरूरत पडऩे पर अधिकारियों को देना होगा। अब सरकार के इस फैसले पर कुछ प्रमुख कंपनियों ने आपत्ति जताई है। नॉडवीपीएन जैसी कई बड़ी कंपनियों ने कहा है कि यदि सरकार अपना फैसला नहीं बदलती है या कोई दूसरा विकल्प नहीं देती है तो उन्हें भारतीय बाज़ार से अपना बिज़नेस समेटने पर मजबूर होना पड़ेगा।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की एजेंसी सीईआरटी ने पिछले हफ़्ते अपने एक आदेश में कहा है कि वीपीएन सेवा प्रदाताओं को अपने उपयोगकर्ताओं के नाम, ईमेल आईडी और आईपी एड्रेस सहित अन्य डाटा को ५ साल या उससे अधिक समय तक सेव करके रखना होगा। आदेश में कहा गया है कि यदि किसी कारणवश से किसी वीपीएन कंपनी का रजिस्ट्रेशन रद्द होता है तो उसके बाद भी उसे डाटा मांगा जा सकता है। सीधे शब्दों में कहें तो किसी वीपीएन कंपनी के बंद या बैन होने के बाद भी उसे सरकार को डाटा देना होगा। नया कानून २८ जून २०२२ से लागू हो रहा है। आदेश में यह भी कहा गया है कि सभी सेवा प्रदाताओं को अपने सिस्टम में अनिवार्य रूप से लॉगिन की सुविधा देनी चाहिए।

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