वॉशिंगटन,21 सितंबर। अमेरिका-ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुई न्यूक्लियर सबमरीन डील ऑकस (AUKUS) ने कई देशों के कान खड़े कर दिए हैं। करार पर फ्रांस के कड़ी आपत्ति जताने के बाद अब नॉर्थ कोरिया ने भी इस पर चिंता जाहिर की है। नॉर्थ कोरिया ने इस डील का विरोध करते हुए कहा है कि इससे एशिया-प्रशांत में परमाणु रेस की होड़ शुरू हो जाएगी। ऑस्ट्रेलिया, यूनाइटेड किंगडम ब्रिटेन और यूनाइटेड स्टेट अमेरिका के बीच एक समझौता हुआ है। इसे ऑकस (AUKUS) नाम दिया गया है। इसमें ऑस्ट्रेलिया को न्यूक्लियर पावर्ड (परमाणु ऊर्जा से चलने वाली) सबमरीन बनाने की तकनीक दी जाएगी। तीनों देशों के बीच हुई डील से फ्रांस बेहद नाराज है। क्योंकि, इस डील के बाद फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया के बीच 2016 में हुआ 12 सबमरीन बनाने का सौदा खत्म हो गया है। यह डील अरबों डॉलर की थी। इसके तहत ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस को 90 बिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर चुकाने वाला था। इस नए समूह का मकसद चीन के हिंद प्रशांत और द. चीन सागर क्षेत्र में उसके प्रभाव को रोकना है। इस गठबंधन में शामिल तीनों देश साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और पानी के नीचे की क्षमताओं समेत अपनी तमाम सैन्य क्षमताओं को बेहतर बनाने के लिए एक दूसरे से तकनीक साझा करेंगे। यह गठबंधन इसलिए अहम माना जा रहा है कि चीन के अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया दोनों ही के साथ संबंध लगातार खराब हो रहे हैं और क्षेत्र में चीन लगातार घिर रहा है। सबमरीन डील के बाद फ्रांस ने अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया से अपने राजदूतों को वापस बुला लिया। तीनों देशों के बीच हुई डील से फ्रांस बेहद नाराज है। क्योंकि, इस डील के बाद फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया के बीच 2016 में हुआ 12 सबमरीन बनाने का सौदा खत्म हो गया है। यह डील अरबों डॉलर की थी। इसके तहत ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस को 90 बिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर चुकाने वाला था। व्हाइट हाउस ने बयान जारी कर फ्रांस के इस कदम को खराब बताया। अमेरिका की तरफ से कहा गया कि वे फ्रांस से मतभेद दूर करने के लिए बातचीत करते रहेंगे। ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री मरीस पेन ने कहा कि वे फ्रांस से अच्छे संबंधों की उम्मीद करती हैं, ऑस्ट्रेलिया बातचीत जारी रखेगा। इस तरह राजदूत को बुलाना अच्छा नहीं है।



