नई दिल्ली, 3 अगस्त। वित्त राज्यमंत्री ने सोमवार को सदन को जानकारी देते हुए बताया कि सरकार डिजिटल इकोनॉमी के लिए ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी की संभावनाओं पर विचार कर रही है। उन्होंने बताया कि क्रिप्टोकरेंसी को लेकर इंटर मिनिस्ट्रियल पैनल ने साफ-साफ कहा है कि प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी पर बैन लगना चाहिए। देश में एकमात्र डिजिटल करेंसी की मान्यता होगी जिसे सरकार जारी करेगी।
वित्त राज्यमंत्री ने कहा कि क्रिप्टोकरेंसी को लेकर इंटर मिनिस्ट्रियल पैनल जो कुछ सुझाव देगी, सरकार उसके हिसाब से अपना फैसला लेगी। पैनल के सुझाव के बाद ही सरकार इस दिशा में आगे बढ़ेगी। अगर इसके लिए किसी तरह की कानूनी प्रस्ताव की जरूरत होती है तो सरकार इससे संबंधित कानून को भी सदन में पेश करेगी।
पिछले दिनों एक रिपोर्ट में कहा गया था कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया खुद की डिजिटल करेंसी लाने पर तेजी से काम कर रहा है. बहुत जल्द इसकी पायलट टेस्टिंग भी शुरू होने वाली है। भारत में डिजिटल करेंसी की वर्तमान स्टेटस की बात करें तो अभी तक रिजर्व बैंक ने प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी को कानूनी मान्यता नहीं दी है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसकी ट्रेडिंग पर लगे बैन को हटा दिया है।
एक प्रमुख आर्थिक समाचार पत्र में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के 86 फीसदी सेंट्रल बैंक इस समय सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) की संभावनाओं को लेकर काम कर रहे हैं जबकि 14 फीसदी केंद्रीय बैंकों ने तो पायलट प्रोजेक्ट पर काम करना भी शुरू कर दिया है।
रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर टी रवि शंकर ने कहा कि हम चरणबद्ध तरीके से इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। बहुत जल्द इसके इस्तेमाल संबंधी जानकारी के लिए पायलट टेस्टिंग भी की जाएगी। उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक डिजिटल करेंसी का इस्तेमाल रिटेल में या फिर होलसेल में किए जाने की संभावना पर विचार कर रहा है। साथ ही टेक्नोलॉजी सेंट्रलाइज्ड होगी या फिर डिस्ट्रीब्यूटेड, इसे खुद रिजर्व बैंक जारी करेगा या फिर अलग-अलग बैंक इसे जारी करेंगे जैसी बातों पर भी विचार किया जा रहा है। इसके अलावा मनी लॉन्ड्रिंग समेत किसी भी गलत चीज को रोकने के लिए फेमा(FEMA), आईटी एक्ट (IT Act), कॉइनएज एक्ट (Coinage Act) तथा आरबीआई एक्ट में भी जरूरी बदलाव करने होंगे। उन्होंने कहा कि डिजिटल करेंसी शुरू होने से कैश पर निर्भरता घटेगी और करेंसी छापने में होने वाले खर्च पर भी लगाम लगेगी।
रिजर्व बैंक की डिजिटल करेंसी को लेकर डिप्टी गवर्नर शंकर ने कहा कि इसे भारतीय रिजर्व बैंक से कानूनी मान्यता होगी। इस करेंसी का फॉर्म डिजिटल होगा। इसके अलावा इसकी वैल्यु को लेकर कोई बदलाव नहीं होगा और इसे बिना किसी रुकावट के एक्सचेंज भी किया जा सकेगा। इस समय भारत के अलावा चीन, इंग्लैंड और रूस जैसे देशों के सेंट्रल बैंक भी इस तरह की डिजिटल करेंसी लाने की योजना पर विचार कर रहे हैं।



