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दास के गवर्नर बनने से विदेशी निवेशकों का भरोसा बहाल करने में मिलेगी मदद

मुंबई। नोटबंदी को लागू करने में बड़ी भूमिका निभाने वाले पूर्व नौकरशाह शक्तिकांत दास को रिजर्व बैंक का नया गवर्नर बनाने से विदेशी निवेशकों का भरोसा हासिल करने में मदद मिलेगी, जो उर्जित पटेल के अचानक इस्तीफा देने से डगमगा गया था। यह अपॉइंटमेंट ऐसे वक्त में हुआ है, जब कस्टोडियन बैंक मौद्रिक नीति पर इसका असर समझने की कोशिश कर रहे हैं। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि दास के गवर्नर बनने का क्या असर होगा। इस बारे में डीबीएस बैंक में इंडिया के मार्केट्स हेड आशीष वैद्य ने कहा, ‘नौकरशाह भी पहले अच्छे गवर्नर साबित हुए हैं। नए गवर्नर के सरकार से अच्छे रिश्ते होने पर पॉलिसी पर सरकार के साथ बेहतर तालमेल बनेगा। इससे शॉर्ट टर्म में इनवेस्टर सेंटीमेंट भी मजबूत होगा।’ उन्होंने कहा, ‘इससे मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी के कामकाज पर असर नहीं पड़ेगा क्योंकि वह एक ढांचे के तहत काम करती है।’ दुवुरी सुब्बाराव, वाई वी रेड्डी जैसे आरबीआई के पूर्व गवर्नर नौकरशाह थे, जिनके कार्यकाल की तारीफ होती है।
तीन राज्यों में विपक्षी दलों के मजबूत प्रदर्शन से अगले साल के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के अपने दम पर बहुमत हासिल करने की संभावना कमजोर हुई है। रिजर्व बैंक की मॉनिटरी पॉलिसी पर इसका भी असर पड़ सकता है। हालांकि, विदेशी निवेशकों ने अभी निवेश रोक दिया है और वे हालात को समझने की कोशिश कर रहे हैं। बेंचमार्क बॉन्ड यील्ड में मंगलवार को 0.12 पर्सेंट की उछाल आई थी, जिससे बॉन्ड के दाम कम हुए थे। हालांकि, हायर लेवल पर सरकारी बैंकों के बॉन्ड खरीदने से इसमें रिकवरी हुई। बॉन्ड यील्ड और बॉन्ड के दाम में उलटा रिश्ता होता है। यील्ड आखिर में 7.52 पर्सेंट पर रही, जो सोमवार के लेवल से कम है। शेयर बाजार में भी आधा पर्सेंट की तेजी आई। रुपया डॉलर के मुकाबले 0.74 पर्सेंट कमजोर होकर 71.87 पर बंद हुआ। दिन की ट्रेडिंग के दौरान एक समय यह 1.54 पर्सेंट तक टूट गया था, लेकिन रिजर्व बैंक के बाजार में दखल देने के बाद रुपये में रिकवरी हुई। ब्रिटेन के सन ग्लोबल इन्वेस्टमेंट्स में इन्वेस्टमेंट अडवाइजरी और ईएम कैपिटल मार्केट्स के हेड अजय मारवाह ने कहा, ‘देश की इंस्टीट्यूशनल स्ट्रेंथ से भारत पर निवेशकों का भरोसा बना हुआ था। हालांकि, गवर्नर के अचानक इस्तीफा देने से संस्थानों की स्वायत्तता संदिग्ध हो गई है।’ उन्होंने कहा कि नए गवर्नर को रिजर्व बैंक की स्वायत्तता को स्थापित करना होगा। यह बहुत महत्वपूर्ण है। आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने सोमवार को ‘निजी कारणों’ से गवर्नर के पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया था। कई लोगों का कहना है कि सरकार के साथ चल रहे टकराव की वजह से उन्हें पद छोड़ना पड़ा। आरबीआई के रिजर्व, एनबीएफसी के लिए लिक्विडिटी बढ़ाने जैसे मुद्दों पर उनकी सरकार से नहीं बन रही थी।

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