नई दिल्ली। कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन को देश का नया मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) नियुक्त किया गया है। पारंपरिक तौर पर सलाहकार जैसे पदों के लिए किसी तर्जुबेदार व्यक्ति की तलाश की जाती है और जहां तजुर्बे की बात आती है, तो व्यक्ति का उम्रदराज होना स्वाभाविक हो जाता है। लेकिन नए सीईए के मामले में यह स्थिति बिल्कुल उलट है। वे दिखने में बेहद यंग और एनर्जेटिक नजर आते हैं। फिर उनकी कौन सी खासियत ने उन्हें देश के इस सबसे प्रतिष्ठित पद पर आसीन करने में मदद की। आइए हम आपको बताते हैं। कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन देश के टॉप बिजनस स्कूल इंडियन स्कूल ऑफ बिजनस (आईएसबी) में पढ़ाते हैं। आईएसबी देश का एकमात्र संस्थान है, जो अपने अग्रणी शोध को लेकर दुनिया के 100 शीर्ष बिजनस स्कूलों में शामिल है। वर्तमान में वह वहां फाइनैंस के एसोसिएट प्रफेसर और सेंटर फॉर एनालिटिकल फाइनैंस के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर हैं। आईएसबी की वेबसाइट के मुताबिक, आईआईटी, आईआईएम से पढ़ाई करने के बाद शिकागो-बूथ से पीएचडी की डिग्री लेने वाले सुब्रमण्यन दुनियाभर में बैंकिंग, कॉरपोरेट गवर्नेंस और इकनॉमिक पॉलिसी के बेहतरीन विशेषज्ञों में से हैं।
सेबी के लिए कॉरपोरेट गवर्नेंस और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के लिए गवर्नेंस ऑफ बैंक्स पर विशेषज्ञ समितियों को दी गई सेवाओं ने उन्हें भारत में कॉरपोरेट गवर्नेंस और बैंकिंग सुधार के मुख्य स्थापत्यों में शुमार किया है। वह अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट पॉलिसी वर्क, प्राइमरी मार्केट्स, सेकेंडरी मार्केट्स ऐंड रिसर्च पर सेबी की स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। कॉरपोरेट पॉलिसी वर्क के तहत, उन्होंने बंधन बैंक, नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ बैंक मैनेजमेंट और आरबीआई अकैडमी के बोर्ड में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। कृष्णमूर्ति ने यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो बूथ स्कूल ऑफ बिजनेस से पीएचडी की डिग्री ली है। बैंकिंग, लॉ ऐंड फाइनैंस, इनोवेशन ऐंड इकनॉमिक ग्रोथ और कॉरपोरेट गवर्नेंस पर उनका रिसर्च द रिव्यू ऑफ फाइनैंशल और द जर्नल ऑफ लॉ ऐंड इकनॉमिक्स जैसे दुनिया के शीर्ष जर्नल में प्रकाशित हो चुके हैं। आईएसबी में टीचिंग शुरू करने से पहले वह न्यूयॉर्क में जेपी मॉर्गन चेज के साथ कंसल्टेंट के तौर पर काम कर चुके हैं। वह आईसीआईसीआई लिमिटेड में एलिट डेरिवेटिव रिसर्च ग्रुप के प्रबंधन में अपनी सेवाएं दे चुके हैं।



