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लॉन्ग टर्म इनवेस्टर्स को लुभा रही है सन फार्मा

नई दिल्ली। सन फार्मा का स्टॉक पिछले चार महीने में 38% टूट चुका है। इसकी वजह कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़े मुद्दे रहे हैं। इनवेस्टर्स को सबसे ज्यादा फिक्र सन फार्मा के प्रमोटरों से जुड़ी रियल एस्टेट फर्म सुरक्षा रियल्टी के साथ कंपनी के रिश्ते हैं। माडिया में आई हालिया खबरें बताती हैं कि एक व्हिसलब्लोअर की शिकायत पर सेबी कंपनी के रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शंस की जांच कर रही है। जांच के प्रतिकूल नतीजे आने के आसार भी बाजार की चिंता बढ़ा रहे हैं। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि 2017-18 में उसके अनसिक्योर्ड लोन में तेज उछाल आने की वजह थर्ड पार्टी-एटलस ग्लोबल ट्रेडिंग के साथ हुआ एकाउंट सेटलमेंट था। यह सेटलमेंट इसलिए करना पड़ा था क्योंकि सन फार्मा अपने हलोल प्लांट पर अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) की तरफ से पाबंदी लगाए जाने के चलते सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट पूरा नहीं कर पाई थी। कंपनी ने यह भी साफ किया है कि उसकी तरफ से सुरक्षा रियल्टी को कोई लोन या गारंटी नहीं दी गई है।
सन फार्मा ने हाल में जो क्लैरिफिकेशन दिए हैं, उससे कॉरपोरेट गवर्नेंस को लेकर बनी कुछ चिंताएं दूर हुई हैं, लेकिन अब भी बहुत सी चीजें बाकी हैं। इसलिए सन फार्मा का कॉरपोरेट गवर्नेंस का इश्यू मीडियम टर्म में निवेशकों पर भारी पड़ सकता है। मार्केट सेंटीमेंट अब कंपनी के खिलाफ है, लेकिन एनालिस्ट कई वजहों से सन फार्मा पर बुलिश हो रहे हैं। कंपनी के प्रॉफिट में हुआ रिवाइवल कुछ वर्षों तक जारी रह सकता है। सन फार्मा को 2019-20 में जो नेट प्रॉफिट हासिल होने का अनुमान दिया गया है, वह 2018-19 के प्रॉफिट से 35% ज्यादा रह सकता है। सन फार्मा के प्रॉफिट में रिवाइवल होने की कई वजहें हैं। सबसे बड़ी बात अमेरिका में स्पेशियलिटी बिजनेस की एस्टिमेटेड ग्रोथ है। सन फार्मा फिलहाल इस बिजनेस में इनवेस्टमेंट कर रही है। कंपनी के हलोल प्लांट को अमेरिकी एडीए का क्लीयरेंस मिल चुका है। इससे स्पेशियलिटी बिजनेस से कंपनी की आमदनी बढ़ सकती है। इससे सन फार्मा की रेवेन्यू विजिबिलिटी में सुधार तो आएगा ही, साथ में वह आने वाले समय में स्पेशियलिटी फार्मा कंपनी में बदल जाएगी। कंपनी कई स्पेशियलिटी प्रॉडक्ट्स लॉन्च करने की योजना बना रही है, लेकिन इसका उसकी आमदनी पर असर 2019-20 की दूसरी छमाही में दिखेगा। कंपनी ने हाल में अपने घरेलू कारोबार की रिस्ट्रक्चरिंग की है। यह अपने घरेलू कारोबार को रिलेटेड पार्टी आदित्य मेडिसेल्स से लेकर पूरे मालिकाना हक वाली सब्सिडियरी को शिफ्ट कर रही है। यह कंपनी की तरफ से उठाया जा रहा एक और सकारात्मक कदम है। इससे कॉरपोरेट गवर्नेंस संबंधी चिताएं दूर होने के साथ ग्रोथ प्रॉस्पेक्ट्स भी बेहतर होंगे। वैल्यूएशन में आई गिरावट एनालिस्टों के कंपनी पर बुलिश होने की दूसरी वजह है। हालांकि यह फिलहाल शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव का रिस्क उठाने की क्षमतावाले लॉन्ग टर्म इनवेस्टर्स के लिए सही रहेगा।

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