अमृतसर,3जुलाई । पूर्व कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने कैप्टन सरकार को घेरते हुए पंजाब में हो रहे पावर कट को लेकर कई ट्वीट किए हैं। हैरानी वाली बात यह है कि एक तरफ सिद्धू महंगी बिजली पर सरकार को घेर रहे हैं और दूसरी तरफ उन्होंने अपनी ही कोठी का अभी तक 8.67 लाख रुपये का बिजली बिल तक जमा नहीं किया है। इसकी दो जुलाई को आखिरी तारीख थी जो बीत चुकी है।
नवजोत सिद्धू विभागीय रिकार्ड के मुताबिक डिफाल्टर चल रहे हैं। पावरकाम के मुताबिक 15 दिसंबर, 2020 को सिद्धू के नाम 15,86,730 रुपये , 18 जनवरी को 16,55,880 रुपये, 18 फरवरी को 17,10,870 रुपये और 19 मार्च को 17,58,800 रुपये का बिजली का बिल जारी हुआ। विभाग के मुताबिक, सिद्धू ने मार्च का बिल जारी होने के बाद ही 10 लाख रुपये बिजली का बिल जमा करवाया। फिर 20 अप्रैल को उनका 7,89,310 रुपये का बिल और 22 जून को 8,67,540 रुपये बिल जारी हुआ। इसके भुगतान की अंतिम तारीख दो जुलाई थी, लेकिन शाम तक इसे जमा नहीं करवाया गया।
नवजोत सिंह सिद्धू के नाम पर खाता नंबर-3002908209 के तहत चल रहा बिजली का कनेक्शन 40-50 किलोवाट के करीब है। मीडियम सप्लाई (एमएस) के तहत उनके घर लगे थ्री फेस मीटर की रीडिंग लेने के लिए निजी कंपनी का मीटर रीडर नहीं जाता। विभाग के जूनियर इंजीनियर (जेई) या सब डिवीजनल अधिकारी (एसडीओ) खुद मीटर रीडिंग लेने जाता है।
पावरकाम के नियम के अनुसार यदि किसी उपभोक्ता का बिजली बिल ड्यू डेट तक न भरा जाए तो एक या दो सप्ताह के बाद बिजली कनेक्शन काट दिया जाता है। आम उपभोक्ता का बिल लाखों में न होकर हजारों रुपये में ही पेंडिंग होने पर पावरकाम के कर्मचारी बिजली का कनेक्शन काट देते हैं। तो फिर किसी खास के नाम पर यह मेहरबानी क्यों की जा रही है, यह पूछे जाने पर पावरकाम के चीफ इंजीनियर सकतर सिंह का कहना है कि नवजोत सिंह सिद्धू एक जिम्मेदार नागरिक हैं, लेकिन उन पर साढ़े आठ लाख रुपये से ज्यादा का बिल बकाया है। बिल का भुगतान समयबद्ध जरूरी है। यदि कोई उपभोक्ता पावरकाम का बिल समय पर जमा नहीं करवाता तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती है। इस मामले में नियमानुसार जो भी कार्रवाई बनती है, वह की जाएगी।



