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नीति आयोग का ब्लूप्रिंट, सत्ता में लौटी मोदी सरकार तो यह होगा अजेंडा

नई दिल्ली। हर घर को पक्का मकान, पानी कनेक्शन, शौचालय और 24×7 बिजली आपूर्ति, कुल कार्यबल के मौजूदा कुशल श्रम को 5.4 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी करना, जलमार्ग के जरिए माल ढुलाई को दोगुना तक बढ़ाना, नैशनल हाईवेज की कुल लंबाई को दोगुना करना और भारतीय रेलवे के लिए अलग रेग्युलटेर की व्यवस्था। यह कुछ ऐसे कदम हैं, जो सरकार पांच साल में 15 अगस्त, 2022 तक पूरा करना चाहती है, जब देश आजादी के 75वें वर्ष का जश्न मना रहा होगा। यदि मोदी सरकार अगले साल लोकसभा चुनाव में जीतकर दोबारा सत्ता में आती है तो इन लक्ष्यों को हासिल करना उसका मुख्य अजेंडा होगा।
मोदी सरकार को अपने थिंक टैंक नीति आयोग से 5 साल का ब्लूप्रिंट मिला है, जिसमें 2022-23 तक अर्थव्यवस्था को 4 ट्रिल्यन डॉलर का बनाने का लक्ष्य रखा गया है। ‘स्ट्रैटजी फॉर न्यू इंडिया @75’ नाम के इस ब्लू प्रिंट को गुरुवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली और नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने जारी किया। इसमें कुल 41 अध्याय हैं। इसे चार खंडों…चालक (ड्राइवर्स), बुनियादी ढांचा, समावेश और राजकाज में बांटा गया है। ब्लू प्रिंट में 2018-23 के बीच आर्थिक वृद्धि दर को औसतन 8 फीसदी रखने का लक्ष्य है। ऐसा हुआ तो भारतीय अर्थव्यवस्था मौजूदा 2.7 ट्रिल्यन से बढ़कर 2022-23 तक 4 ट्रिल्यन डॉलर की हो जाएगी। इसके साथ ही 2030 तक 5,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। निवेश दर को जीडीपी के 36 फीसदी और टैक्स जीडीपी अनुपात को 22 फीसदी तक बढ़ाने का टारगेट रखा गया है। इसमें कहा गया है कि देश अब आर्थिक संक्रमण के दौर को पूरा करने के करीब है और इसके साथ प्रति व्यक्ति आय 2022-23 में बढ़कर 3,000 डॉलर हो जाएगी जो 2017-18 में 1,900 डॉलर था। ब्लू प्रिंट में कहा गया है कि 2022 तक सभी परिवारों के पास पक्का मकान हो जिसमें पानी कनेक्शन, शौचालय और 24 घंटे बिजली आपूर्ति हो।
ई-राष्ट्रीय कृषि बाजार (ईनाम) का विस्तार कर और कृषि उपज विपणन समिति कानून की जगह कृषि उपज पशुधन विपणन (एपीएलएम) लाकर कृषि क्षेत्र में किसानों को कृषक उद्यमी बनाने पर जोर दिया गया है। इसमें कहा गया है, ‘एकीकृत राष्ट्रीय बाजार का गठन, मुक्त निर्यात व्यवस्था और जरूरी जिंस कानून को समाप्त करना कृषि वृद्धि के लिए जरूरी है।’ आधुनिक तकनीक, उत्पादकता वृद्धि और एग्रो प्रोसेसिंग को बढ़ावा दिया जाएगा। विभिन्न उपायों के जरिए किसानों की आमदनी को दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है। आयोग ने कहा कि कृषि क्षेत्र के लिए उर्वरक, बिजली और फसल बीमा आदि के लिए अलग-अलग सब्सिडी देने के बजाए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के जरिए प्रति एकड़ जमीन के लिए शुरू में ही सब्सिडी देने पर विचार किया जा सकता है।
नीति आयोग ने रेलवे को किराये ढांचे और सब्सिडी को तर्कसंगत बनाने का सुझाव दिया है और अपनी संपत्तियों के मौद्रिकरण से राजस्व जुटाने को कहा है। रिपोर्ट में कहा कि ढुलाई भाड़ा सड़क परिवहन की लागत के साथ प्रतिस्पर्धी होना चाहिए। 2022-23 तक भारत के पास ऐसा रेल नेटवर्क हो जो न केवल दक्ष, विश्वसनीय और सुरक्षित हो बल्कि लागत दक्ष और पहुंच वाला भी हो। इसी अवधि में ब्रॉड गेज का शतप्रतिशत विद्युतीकरण, माल गाड़ियों की औसत रफ्तार को 2016-17 के 24 किलोमीटर से बढ़ाकर 50 किलोमीटर प्रति घंटा और मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों की औसत रफ्तार को 60 किलोमीटर से बढ़ाकर 80 किलोमीटर प्रति घंटा करना होगा। रेलवे के लिए अलग रेग्युलेटर बनाने की भी बात कही गई है। नीति आयोग ने श्रम सुधारों को पूरा करने, महिला कार्यबल की भागीदारी बढ़ाने, न्यूनतम मजदूरी लागू करने, रोजगार आंकड़ा संग्रह में सुधार और सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाने का सुझाव दिया है। आयोग ने नौकरी से हटाने पर मुआवजा यानी ‘सेवरेंस पे’ को बढ़ाया जाना चाहिए। विवादों के त्वरित, निष्पक्ष और कम लागत पर निपटान के लिए श्रम विवाद समाधान प्रणाली में भी सुधार लाने पर जोर दिया है। मजदूरी के बारे में कहा गया है कि सरकार को राष्ट्रीय स्तर पर पर न्यूनतम मजदूरी का अनुपालन सुनिश्चित करना चाहिए और न्यूनतम वेतन कानून, 1948 को सभी रोजगारों में लागू किया जाना चाहिए। इसके अलावा मजदूरी का भुगतान चेक या आधार युक्त भुगतान से ही हो। इसके अलावा दस्तावेज में सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाने का सुझाव दिया गया है।
बिजली क्षेत्र में सुधार के लिए स्मार्ट ग्रिड को बढ़ावा देने, बिजली की नीलामी, बिजली वितरण कंपनियों का निजीकरण, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के जरिए सब्सिडी का भुगतान और बिजली आपूर्ति के लिए 100 प्रतिशत मीटर लगाने की बात कही गई है। बिना सूचना के बिजली कटौती के बारे में नीति आयोग के रणनीतिक दस्तावेज में सुझाव दिया गया है कि बिजली वितरण कंपनियां अगर बिजली कटौती करती हैं तो उन पर जुर्माना लगाया जा सकता है। 2022-23 तक डिजिटल क्षेत्र में असामनता दूर करने के लिए डिजिटल बुनियादी ढांचा की अहमियत को रेखांकित किया गया है। डिजिटलीकरण का लाभ हासिल करने के लिए देश के सभी राज्यों, सभी जिलों और ग्राम पंचायतों में डिजिटल संपर्क, 2022 तक सरकारी सेवाओं की डिजिटल माध्यम से आपूर्ति और शत प्रतिशत डिजिटल साक्षरता का लक्ष्य रखा गया है। इसमें यह भी कहा गया है कि इलेक्ट्रानिक्स और आईटी मंत्रालय को डेटा की सुरक्षा, सुरक्षित डिजिटल लेन-देन तथा शिकायतों के निपटान के लिए एक व्यापक साइबर सुरक्षा रूपरेखा विकसित करने की जरूरत है।

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