नई दिल्ली,30 अगस्त। भारतीय विमानन कंपनी एयर इंडिया ने न्यूयार्क की एक अदालत से ब्रिटिश कंपनी केयर्न एनर्जी पीएलसी की उस याचिका को खारिज करने को कहा है जिसमें भारत सरकार के खिलाफ 1.2 अरब डॉलर के मध्यस्थता न्यायाधिकरण के आदेश को लागू करने के लिए उसकी संपत्ति जब्त करने की अपील की गई है। याचिका में कहा गया है कि यह मामला जल्दबाजी में दायर किया गया है, क्योंकि न्यायाधिकरण के फैसले के खिलाफ याचिका अब भी लंबित है।
एयर इंडिया की याचिका वाशिंगटन की अदालत में भारत सरकार द्वारा दी गई याचिका से अलग है। भारत सरकार ने अपनी याचिका में केयर्न के मुकदमे को खारिज करने की अपील की है। एयर इंडिया की याचिका में कहा गया कि महज काल्पनिक सवाल या होने या ना होने की संभावना वाली भविष्य की आकस्मिक घटनाओं पर निर्भर करने वाले विषय पर फैसला करना न्यूयार्क की जिला अदालत के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।
केयर्न ने पहले डिस्ट्रिक्ट आफ कोलंबिया की अमेरिकी जिला अदालत में एक याचिका दायर कर मध्यस्थता न्यायाधिकरण के आदेश को लागू कराने की अपील की थी। इसके बाद उसने न्यूयार्क की अदालत में दूसरी याचिका दायर कर एयर इंडिया को भारत सरकार का वैकल्पिक रूप घोषित करने और इस तरह उसे मध्यस्थता न्यायाधिकरण के कंपनी को 1.2 अरब डालर का भुगतान करने के आदेश को लागू करने का निर्देश देने की अपील की थी।
गौरतलब है कि भारत सरकार ने पिछली तिथि से टैक्स (रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स) लगाने संबंधी कानून के तहत केयर्न एनर्जी पर 10,247 करोड़ रुपये का कर लगाया था। केयर्न एनर्जी ने फैसले को सिंगापुर के अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण में चुनौती दी जिसने पिछले साल दिसंबर में सरकार के कदम को गलत करार दिया और पूरी राशि लौटाने का आदेश दिया। भारत सरकार के इस राशि का भुगतान ना करने पर कंपनी ने अमेरिकी अदालतों का रुख किया है।



