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इकोनामी को बूस्ट देगी आंध्र सरकार की नई आईटी पॉलिसी

हैदराबाद,1 जुलाई। कोरोना महामारी के चलते बढ़ी बेरोजगारी और आर्थिक संकट के बीच आंध्र प्रदेश सरकार ने आईटी सेक्टर के लिए नई पॉलिसी पेश की है‌। सरकार ने इस नीति से आने वाले तीन साल में बड़ी संख्या में रोजगार पैदा होने की उम्मीद जताई है। मुख्यमंत्री वाई. एस. जगन मोहन रेड्डी की अध्यक्षता में राज्य कैबिनेट ने भी इस पर मुहर लगा दी है।
आंध्र प्रदेश सरकार ने बुधवार को नई ‘आंध्र प्रदेश इंन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी पॉलिसी 2021-24’ पेश की। इस पॉलिसी से सरकार को आईटी सेक्टर में अगले तीन सालों में 55,000 नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है। अगर ऐसा होता है तो इससे कोरोना के चलते मंदी और बेरोज़गारी की मार झेल रहे हजारों इंजीनियर्स का सपना पूरा होगा। सरकार का कहना है कि वह अपने आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट को एक रेवेन्यू सेंटर में बदलेगी और स्वायत्तता हासिल करने की दिशा में काम करेगी।
पॉलिसी नोट के मुताबिक इससे जहां हजारों को लोगों को डायरेक्ट एंप्लॉयमेंट मिलेगा, वहीं सरकार का लक्ष्य इससे 1.65 लाख से अधिक इनडायरेक्ट रोजगार पैदा करने का भी है। इसलिए सरकार एक होलिस्टिक एप्रोच अपनाते हुए एक पूरा इकोसिस्टम डेवलप करेगी।
राज्य सरकार ने पॉलिसी में स्टार्टअप कल्चर को बढ़ावा देने पर भी ध्यान दिया है। स्टार्टअप के लिए सरकार इंक्यूबेशन सेंटर, वर्कशॉप का आयोजन करेगी। साथ ही प्लग एंड प्ले ऑफिस स्पेस, निवेशकों, मेंटर्स, टैलेंट पूल, और वेंचर कैपिटलिस्ट तक पहुंच उपलब्ध कराने में एंड-2-एंड सपोर्ट करेगी।
सरकार ने पॉलिसी में हजारों करोड़ रुपये रेवेन्यू कमाने का भी लक्ष्य रखा है। उसे उम्मीद है टैक्स से उसे अगले 10 साल में इससे 783 करोड़ रुपये की कमाई होगी, वहीं हजारों लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने से अर्थव्यवस्था में हर साल करीब 2,200 करोड़ रुपये का निवेश भी आएगा। सरकार की इस प्लानिंग का आईटी विशेषज्ञों ने स्वागत किया है।

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