जम्मू-कश्मीर में 3 एसपीओ की हत्या के बाद 7 पुलिसकर्मियों का इस्तीफा

जम्मू। जम्मू-कश्मीर के शोपियां में आज सुबह हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकियों ने पहले 3 एसपीओ(स्पेशल पुलिस अफसर) समेत 4 लोगों को अगवा किया और उसके सभी पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी। इस वारदात के बाद घाटी में इतनी दहशत है कि अब तक 7 एसपीओ अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं। इस्तीफा देने वालो अफसरों ने वीडियो डालकर इस बात की जानकारी दी है। इन अफसरों में नवाज अहमद लोन, शबीर अहमद ठोकर, नसीर अहमद भट, तजल्ला हुसैन लोन इरशाद बाबा, मुदासिर अहमद व एक अन्य हैं। जम्मू कश्मीर के शोपियां से शुक्रवार सुबह जिन 3 पुलिसकर्मियों को आतंकियों ने अगवा किया था उनकी हत्या कर दी है, वहीं एक एसपीओ के भाई को रिहा कर दिया है। बताया जा रहा है कि जिन पुलिसवालों का अपहरण हुआ है उनमें 3 एसपीओ यानी स्पेशल पुलिस अफसर थे और एक एसपीओ का भाई है। पुलिसवाले शोपियां के दो गांवों से अगवा किए गए हैं जिसमें कापरीन और बतागुंड शामिल हैं। पुलिसवालों के गायब होने के बाद उन्हें ढूंढने के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
बता दें कि बीते दिनों हिजबुल मुजाहिदीन के मुखिया रियाज नेको ने कश्मीर के स्पेशल पुलिस अफसरों को आगाह किया था कि वह अपनी नौकरी छोड़ दें। आतंकी संगठन ने फिलहाल एसपीओ पर नौकरी छोड़ने का दबाव बनाया है और सियासी कार्यकर्ता भी निशाने पर हैं। शोपियां में जो तीन पुलिसकर्मी और 1 नागरिक अगवा किए गए हैं उनकी पहचान एसपीओ फिरदौस अहमद, एसपीओ कुलदीप सिंह, एसपीओ निसार अहमद धोबी, फयाज अहमद भट(निसार अहमद का भाई) के रूप में हुई है। तीन पुलिसकर्मियों को अगवा करने और फिर उनकी हत्या किए जाने के मामले में जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने ट्वीट किया है कि तीन और पुलिसकर्मी आतंकियों की गोली का शिकार हो गए। हम सब इस पर शोक, गुस्सा, हैरानी व सांत्वना व्यक्त करेंगे। दुर्भाग्य से इससे मृतकों के परिवार को कोई शांति नहीं मिलती। महबूबा ने अगले ट्वीट में लिखा कि, पुलिसकर्मियों के अपहरण की बढ़ती घटनाओं से ये साफ होता है कि केंद्र सरकार की बल प्रयोग करने की नीति काम नहीं आ रही है। इसका हल अब सिर्फ बातचीत ही नजर आता है। आतंकियों की इस हरकत को पंचायत चुनाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि आतंकी नहीं चाहते कि राज्य में पंचायत चुनाव हो। यही वजह है कि पंचायत चुनाव की घोषणा के मात्र 24 घंटे के अंदर चार पंचायत घरों को आग लगा दी गई थी जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर थीं। ऐसे में इस तरह पुलिसकर्मियों का गायब होना सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल है।
पुलिसकर्मियों के इस्तीफे की खबर झूठीः गृह मंत्रालय
जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में आतंकियों द्वारा 3 पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद से पूरे देश में आक्रोश फैला हुआ है। जम्मू-कश्मीर पुलिसमहकमे में भी हड़कंप मच गया है। खबर है कि दो पुलिसकर्मियों ने विभाग को विडियो मेसेज के जरिए इस्तीफा सौंप दिया है। हालांकि गृह मंत्रालय ने इसे खारिज किया है। गृह मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर पुलिस के हवाले से कहा है कि यह रिपोर्ट गलत और प्रायोजित हैं। इस तरह की रिपोर्ट कुछ शरारती तत्वों द्वारा गलत प्रॉपेगैंडा पर आधारित हैं। गृह मंत्रालय ने कहा, ‘यहां 30 हजार से ज्यादा पद पर तैनात हैं, जिनकी सेवाएं समय-समय पर रिव्यू की जाती है, लेकिन कुछ शरारती तत्व यह फैला रहे हैं कि जिन लोगों का कार्यकाल प्रशासनिक कारणों से नहीं बढ़ाया गया उन्होंने इस्तीफा दे दिया है।’ बता दें कि शुक्रवार सुबह के शुरुआती घंटों में आतंकियों ने पुलिसकर्मियों को उनके घरों से अगवा कर लिया था। इसके कुछ देर बाद उनके शव एक बाग में मिले। मारे गए पुलिसकर्मियों की पहचान कॉन्स्टेबल निसार अहमद और दो स्पेशल पुलिस ऑफिसर (एसपीओ) फिरदौर अहमद और कुलवंत सिंह के रूप में हुई। इस जघन्य कांड के बाद मीडियो रिपोर्ट्स में इस्तीफा देने वालों की अलग-अलग संख्या बताई गई है।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि उन्हें बाटागुंड और कपरान गांव स्थित उनके घर से शुक्रवार सुबह अगवा किया गया था। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों ने उन्हें ढूंढने के लिए गहन छानबीन शुरू की थी लेकिन आतंकियों ने उनकी गोलियों से भूनकर हत्या कर दी। उनके शव वांगम में एक बाग से बरामद किए गए। पुलिस ने बताया बाटागुंड गांव के लोगों ने भी आतंकियों का पीछा किया था और पुलिसकर्मियों की रिहाई के लिए अपील की थी। लेकिन आतंकियों ने ग्रामीणों को डराने के लिए हवा में फायरिंग कर दी। हिज्बुल मुजाहिदीन के कथित ट्विटर हैंडल से घटना की जिम्मेदारी ली गई। बताया जा रहा था कि साथियों की हत्या से निचली रैंक के पुलिसकर्मियों में दहशत पैदा हो गई और करीब दो पुलिसकर्मियों ने विडियो मेसेज जारी कर खुद को फोर्स से अलग करने की घोषणा की। सोशल मीडिया में एक विडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें कहा गया है, ‘मेरा नाम इरशाद अहमद बाबा है और मैं पुलिस में कॉन्स्टेबल पद पर हूं। मैं अपना इस्तीफा सौंप रहा हूं….।’ जम्मू-कश्मीर पुलिस के एसपीओ तजाल्ला हुसैन लोन ने कहा कि उन्होंने 17 सितंबर को पलिस विभाग से इस्तीफा दे दिया और वह ये वीडियो इसलिए जारी कर रहे हैं ताकि उनके इस कदम को लेकर किसी तरह का कोई शक नहीं बना रहे। बता दें कि हिज्बुल मुजाहिदीन कमांडर रियाज नायकू ने कई बार स्थानीय पुलिसकर्मियों खासकर एसपीओ को नौकरी छोड़ने की धमकी दी थी और कहा था कि सरकार उनका इस्तेमाल कर रही है। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी ट्विटर पर इस घटना पर खेद जताया।
उन्होंने लिखा, ‘3 पुलिसकर्मियों ने आतंकवादियों की गोलियां खाकर अपनी जान गंवा दी। हमेशा की तरह गुस्सा, दुख और निंदा जैसे शब्द सुनने को मिलेंगे, लेकिन दुर्भाग्य से इससे मृतकों के परिवारों को सांत्वना नहीं मिलेगी।’ उन्होंने आगे कहा, ‘स्पष्ट रूप से पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों के अपहरण की घटनाओं में वृद्धि के साथ केंद्र सरकार की नीति बिल्कुल काम नहीं कर रही है। संवाद अब एकमात्र रास्ता प्रतीत होता है।’

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