काबुल,२६ मई। अफ़ग़ानिस्तान में बुधवार को हुए कई धमाकों में कम से कम १४ लोगों की मौत हो गई। तालिबान के मुताबिक काबुल में एक मस्ज़िद में धमाका हुआ, जिसमें पांच लोग मारे गए। इसके अलावा उत्तरी अफगानिस्तान में तीन मिनी वैन में हुए धमाकों में नौ लोग मारे गए हैं, जो सभी शिया समुदाय के थे। काबुल इमरजेंसी हास्पिटल ने कहा कि मस्ज़िद में हुए धमाके के २२ पीड़ित उसके यहां लाए गए थे, इनमें पांच की मौत हो चुकी थी। तालिबान पुलिस के प्रवक्ता खालिद जदरान ने कहा कि यह विस्फोट हजरत जकारिया मस्जिद में हुआ है। आपको बता दें कि इस्लामिक स्टेट ने उत्तरी अफगान शहर मजा़र-ए-शरीफ़ में हुए हमले की जिम्मेदारी ली।
ख़बरों के मुताबिक, काबुल की एक मस्ज़िद में एक और उत्तरी शहर मजार-ए-शरीफ में यात्री वैन में तीन धमाके हुए। काबुल के आपातकालीन अस्पताल ने ट्वीट कर जानकारी दी है कि विस्फोट स्थल से पांच शव मिले और एक दर्जन से अधिक घायल मरीज मिले हैं। वहीं, तालिबान प्रशासन के एक अफसर ने नाम न छापने की शर्त पर जानकारी दी कि मस्जिद में हुए विस्फोट में कम से कम ११ लोगों की मौत हुई है। वहीं, उत्तरी बल्ख प्रांत में यात्री वैन में हुए तीन विस्फोटों में कम से कम नौ लोगों की मौत हुई है और १५ घायल हुए हैं।
बल्ख़ प्रांत के पुलिस प्रवक्ता मोहम्मद आसिफ वजेरी ने बताया कि यह सभी हमले शिया समुदाय को टारगेट करके किए गए जो अफ़ग़ानिस्तान में अल्पसंख्यक हैं।
काबुल के रहने वाले चश्मदीद ने कहा- “हम यहीं पास में थे तभी बहुत जोर से धमाके की आवाज़ आई। आवाज इतनी जबरदस्त थी कि हम सब होश खो बैठे। ये धमाका जरकारिया मस्जिद में नमाज के बाद हुआ, लेकिन बहुत लोग मस्ज़िद के अंदर थे जब हम वहां पहुंचे तो हमने ज़मीन पर लाशें और कई लोगों को घायल पाया।
इसके पहले २१ अप्रैल को मजार-ए-शरीफ की मस्जिद में धमाका हुआ था। इसमें पांच लोगों की मौत हो गई थी, जबकि ६५ लोग घायल हो गए थे। इस हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ने ली थी, जो एक कट्टर इस्लामिक आतंकी संगठन है।
इसी दिन मजार-ए-शरीफ के कुदुंज प्रांत के सरदारवर इलाके में भी धमाका हुआ था, जिसमें ४ लोगों की मौत और १८ लोग घायल हुए थे।
१९ अप्रैल को काबुल के अब्दुल रहीम शाहिद हाई स्कूल में धमाके हुए थे, जिसमें ६ लोगों की मौत हो गई थी जबकि दर्जन भर से अधिक घायल हो गए थे।
गौरतलब है कि सुन्नी-बहुल अफ़ग़ानिस्तान में आईएस की क्षेत्रीय शाखा ने बार-बार शियाओं और सूफी जैसे अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया है। आईएस तालिबान की तरह एक सुन्नी इस्लामी समूह है, लेकिन दोनों कड़े प्रतिद्वंद्वी माने जाते हैं।



