“यथा ह्येकेन चक्रेण न रथस्य गतिर्भवेत् !धर्म / January 27, 2024 January 27, 2024 “यथा ह्येकेन चक्रेण न रथस्य गतिर्भवेत् ! एवं परुषकारेण विना दैवं न सिद्ध्यति।।” अर्थ- बिना परिश्रम के भाग्य भी सिद्ध नहीं होता। यह ठीक वैसे ही है जैसे, रथ या गाड़ी बिना एक पहिया के नहीं चल सकती।