नई दिल्ली , २१ सितम्बर । ग्रामीण फाउंडेशन ने घोषणा की कि वह भारत में डिजिटल इनोवेशन द्वारा सक्षम मार्केट एक्सेस (मंडी) परियोजना के दूसरे चरण को लॉन्च करके छोटे किसानों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को बढ़ाएगा, जिसे वॉलमार्ट फाउंडेशन के २ मिलियन डॉलर के अनुदान ने संभव बनाया है। मंडी का उद्देश्य किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) की क्षमताओं का निर्माण करके पश्चिम बंगाल और पूर्वी उत्तर प्रदेश में छोटे किसानों, विशेषकर महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान करना होगा। मंडी प्रोजेक्ट के पहले चरण के दौरान, जिसे वॉलमार्ट फाउंडेशन का समर्थन भी मिला, ग्रामीण फाउंडेशन ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में ४० एफपीओ की क्षमता बढ़ाने में मदद की, बाजार के संचालन को सुविधापूर्ण बनाने में सहायक हुए और वित्त, डेटा और प्रौद्योगिकी तक पहुँच प्रदान की, विशेष रूप से महिला शेयरहोल्डरों की भागीदारी में वृद्धि की गई। यह ग्रामीण द्वारा रिपोर्ट किए गए मंडी प्रथम चरण की उपलब्धियों में शामिल है।
जेंडर मुख्यधारा: ८,३०० से अधिक महिलाओं को एफपीओ में नए सदस्यों के रूप में जोड़ा गया। ४० एफपीओ में से १८ में अब कम से कम ४० फीसदी महिला सदस्यता है। जबकि बेसलाइन पर यह १२.५ फीसदी थी। कुल १४२ स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को २५ एफपीओ के साथ जोड़ा गया है, जिसके परिणामस्वरूप विभिन्न जेंडर-सम्मिलित मूल्य श्रृंखलाएं जैसे मोरिंगा, मिर्च, एलोवेरा जैसे औषधीय पौधे और डेयरी के साथ-साथ उत्पादन श्रृंखलाएं भी स्थापित की गई हैं। उत्पादन श्रृंखलाओं में लौकी से बनने वाली मिठाइयाँ और वैकल्पिक जैविक खाद के रूप में वर्मीकम्पोस्ट शामिल हैं।
कृषि प्रौद्योगिकियों को अपनाना: एफपीओ द्वारा अपनाई गई १४ कृषि प्रौद्योगिकियों से लगभग ९,६०० किसानों को लाभ हुआ। इन प्रौद्योगिकियों में डिजिटल, जलवायु-स्मार्ट और महिला मित्र जैसे समाधान शामिल हैं। इन समाधानों में आरडब्ल्यूसीएम,राइस डॉक्टर, राइस एक्सपर्ट, वंडर पाइप्स, डिबलर्स, कोनो वीडर, मिट्टी में नमी बनाए रखने के लिए फसल अमृत, माइक्रो-न्यूट्रिएंट सक्रियण के लिए बायो सॉइल्ज, और नाइट्रोजन संतुलन के लिए नैनो यूरिया शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त २७ एफपीओ के १,२०० किसानों ने विविधीकरण और जलवायु-स्मार्ट कृषि प्रथाओं के माध्यम से बायोफोर्टिफाइड जिंक गेहूं और बीटा कैरोटीन युक्त गाजर को अपनाया।



