न्यूयॉर्क,१४ जुलाई। पहले से ही महंगाई, गन वायलेंस और ड्रग्स जैसी समस्याओं से जूझ रहे अमेरिका में अप्रत्याशित रूप से आत्महत्या की घटनाएं बढ़ गई हैं। २००० से २०२१ में ही आत्महत्या की दर ३७% बढ़ी है। वहीं, अपनों को खोने के दुख और सदमे से उबरने के लिए काउंसलिंग कैंप बढ़ गए हैं। यहां वाले लोगों की संख्या भी ५०% तक बढ़ गई है। इससे पता चलता है कि बड़ी संख्या में लोग अपनों के खोने के सदमे से गुजर रहे हैं। इनमें अधिकांश बच्चे हैं, जिन्हें अपने मां, पिता या किसी रिश्तेदार को खोने का गहरा सदमा पहुंचता है।
शोध से पता चलता है कि २०२१ तक हाई स्कूल के ४०% से अधिक छात्रों ने कहा कि वे दुखी या निराश महसूस करते हैं। ३०% किशोर लड़कियों और १४% किशोर लड़कों ने गंभीरता से आत्महत्या पर विचार किया था। डेटा के मुताबिक, १३% किशोर लड़कियों और ७% किशोर लड़कों ने आत्महत्या का प्रयास किया था।
जून २०२२ में ‘द लांशेट साइकेट्री’ ने डिप्रेशन से जूझ रहे मरीजों के बारे में एक रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसके मुताबिक ‘इलेक्ट्रोकंवल्सिव थेरेपी’ से इन मरीजों के आत्महत्या करने की दर में ५० फीसदी तक कमी आई।



