काबुल,२५ जून। अफगानिस्तान में महिलाओं के खिलाफ हिंसा की घटनाएं बढ़ने पर संयुक्त राष्ट्र ने चिंता जताई है। मानवाधिकार परिषद के ५३वें नियमित सत्र में राय और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत आइरीन खान ने कहा कि अफगानिस्तान में महिलाओं की सार्वजनिक उपस्थिति को तालिबान ने पूरी तरह से मिटा दिया है।
महिला अधिकार कार्यकर्ता सुरैया पैकन ने कहा कि किसी मंत्रालय या संस्थान में महिलाओं की उपस्थिति उनके समान कानूनी अधिकारों की पूर्ति नहीं कर सकती है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में अफगानिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि ने अफगानिस्तान में महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ बढ़ती हिंसा की आलोचना की।
कतर में तालिबान के राजनीतिक कार्यालय के प्रमुख सुहैल शाहीन ने उन दावों को चुनौती दी कि महिलाओं को राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र से पूरी तरह से निर्वासित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि कुछ महिलाओं को अफगान सरकार के संस्थानों द्वारा नियोजित किया गया था। उन्हें भविष्य में आवश्यकतानुसार अन्य संस्थानों में भी नियुक्त किया जाएगा।



