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चुनौतियों से भरी हुई है टोरंटो के भारतीय महावाणिज्यदूत की जिम्मेदारी

टोरंटो,१६ अगस्त। टोरंटो में भारत के महावाणिज्यदूतवास के प्रमुख सिद्धार्थ नाथ किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। उनकी टोरंटो में पोस्टिंग ऐसे वक्त में हुए है जब इस क्षेत्र में भरी उथल पुथल जारी है। खालिस्तानी नित नई करतूत करके भारत कैनेडा रिश्तों को चुनौती देते रहते हैं। साथ ही पिछले कई मौकों पर कैनेडा के भारतीय दूतावासों के अधिकारियों को इन खालिस्तानियों ने सीधे सीधे धमकी दी है और इनके लिए अपशब्दों का प्रयोग किया है। ऐसे में इन सब बातों से सामंजस्य बिठाना इस क्षेत्र के भारतीय महावाणिज्यदूत के लिए मुश्किल काम है जो सिद्धार्थ नाथ को मिला है।
सिद्धार्थ नाथ २००३ में भारतीय विदेश सेवा में शामिल हुए थे। उन्हें बीजिंग में भारतीय दूतावास (२००५-०९) और जिनेवा में निरस्त्रीकरण सम्मेलन (२०१३-१६) में भारत के स्थायी मिशन में तैनात किया गया है। टोरंटो में भारत के महावाणिज्य दूत के रूप में नियुक्ति से पहले, उन्होंने सिंगापुर में भारत के उप उच्चायुक्त (२०२०-जून २०२३) के रूप में कार्य किया।
नई दिल्ली में मुख्यालय में, उन्होंने संयुक्त राष्ट्र (राजनीतिक) प्रभाग (२००५), अफगानिस्तान और ईरान के लिए डेस्क अधिकारी (२००९-११) और नई दिल्ली में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (२०११-१३) में कार्य किया है। उन्होंने नई दिल्ली में प्रधान मंत्री कार्यालय (२०१७-१९) में निदेशक के रूप में कार्य किया और फिर विदेश मंत्रालय के आंतरिक वित्त प्रभाग (२०१९-२०) का नेतृत्व किया।
उन्होंने भारत में दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और अमेरिका में नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र की पढ़ाई की है।
सिद्धार्थ नाथ ने २००१ बैच की आईएफएस (भारतीय विदेश सेवा) अधिकारी सुश्री अपूर्वा श्रीवास्तव का स्थान लिया है। अपूर्वा को स्लोवाक गणराज्य में भारत के अगले राजदूत के रूप में नियुक्त किया गया है।

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