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उत्तर प्रदेश में टैक्स फ्री ‘द केरल स्टोरी’, क्या सच में ?

बिजनौर,१० मई। केरल में हजारों लड़कियों को ब्रेनवाश कर उन्हें मतांतरित करने के आधार पर बनी फिल्म द केरल स्टोरी इस समय भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी खूब चर्चा पा रही है। जहां एक ओर इसके वास्तविक घटनाओं पर आधारित होने या ना होने को लेकर बहस की जा रही है, वहीं कई संगठनों ने इसके विरोध या पक्ष में विभिन्न बयान जारी किए हैं। फिल्म की लोकप्रियता तथा विभिन्न तत्वों से प्रभावित होकर मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों ने इसे टैक्स फ्री करने की घोषणा भी की है।
यहां हम फिल्म के तत्वों अथवा इसकी वास्तविकता से जुड़ी किसी बात पर चर्चा नहीं कर रहे हैं बल्कि हम चर्चा कर रहे हैं फिल्म के टैक्स फ्री किए जाने के बाद भी सिनेमाघरों द्वारा लिए जा रहे टैक्स की।
आपको बता दें कि किसी भी फिल्म के टिकट में दो तरह के टैक्स शामिल होते हैं। सिनेमा टिकट पर १२% या १८% की दर से जीएसटी लगाया जाता है जिसे दो समान भागों में सीजीएसटी अर्थात केंद्रीय भाग और एसजीएसटी अर्थात राज्य सरकार के भाग में बांटा जाता है।
जब कोई राज्य इसे टैक्स फ्री घोषित करता है तो उसका अर्थ है कि वह अपने हिस्से का टैक्स नहीं लेगा। इस प्रकार टिकट पर लगने वाले कुल टैक्स में से राज्य सरकार के हिस्से को समाप्त कर दिया जाता है। रुपयों की भाषा में बात करें तो अमूमन यह लगभग ₹१० से लेकर ₹२५ के बीच होता है।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा द केरल स्टोरी को टैक्स फ्री घोषित किया गया है। अर्थात राज्य सरकार टैक्स में अपने हिस्से को अब नहीं लेगी जिसे सिनेमा देखने वाले ग्राहकों से भी नहीं लिया जा सकता है। किंतु यहां अक्सर सिनेमाघर बड़ा खेल करते हैं। घोषणा होने के कई दिन तक भी सिनेमाघर यह टैक्स लेना जारी रखते हैं और ग्राहकों के पूछने पर जवाब देते हैं कि अभी उनके पास लिखित आदेश नहीं आया है तथा यह एक लंबी प्रक्रिया है जिसमें कई दिन लगते हैं। इस प्रकार सिनेमाघर कम से कम दो-तीन दिन तक इस टैक्स को लेना जारी रखते हैं। अब यह बात आम समझ से परे है कि जहां सूचना प्रौद्योगिकी के इस दौर में पल भर में सूचना यहां से वहां हो जाती हैं वहीं सरकारी आदेश को मनोरंजन अधिकारी और सिनेमाघर प्रबंधन तक पहुंचने तथा ग्राहकों तक उसका लाभ पहुंचने में कई दिन लगना किस प्रकार संभव है। इस संबंध में सिनेमाघरों और मनोरंजन विभाग के पास अपने तर्क हो सकते हैं किंतु ग्राहकों को ऐसा एहसास होता है मानो वह ठगे गए हों।
इन २ से ३ दिनों में यदि इन सिनेमाघरों में एक लाख लोगों ने भी टिकट खरीदा हो तो कम से कम दस लाख रुपया ग्राहकों की जेब से यूं ही चला जाता है। ध्यान रहे कि यह गणना न्यूनतम है, अधिकतम तो यह करोड़ों में भी पहुंच सकती है।
किंतु जैसा कि सब जानते हैं कि आम आदमी की आवाज़ जब तक खूब शोर मचाकर ना उठाई जाए तब तक उस पर ना तो प्रभावी कार्रवाई की जाती है और ना ही कोई प्रभावी सिस्टम बनाया जाता है।
१० मई को यह समाचार लिखे जाने तक सिनेमाघरों का कहना है कि हमारे पास अभी इसके कोई आदेश नहीं आए हैं। प्रमाण के रूप में उत्तर प्रदेश के नगर बिजनौर स्थित स्टार वर्ल्ड सिनेमा का टिकट संलग्न किया जा रहा है जिसमें स्पष्ट तौर पर सीजीएसटी दर्शाया गया है तथा वसूला भी गया है।
अब इस समाचार पर मनोरंजन कर विभाग या प्रदेश सरकार कोई संज्ञान लेकर प्रभावी कार्यवाही करती है या नहीं, यह देखने वाली बात होगी।

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