रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद से ताईवान भी अमेरिका के लिए चिंता का सबब बन गया है। चीन ताईवान को अपना हिस्सा मानता है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने साफ़ कर दिया है कि चीन ताईवान पर कब्जा कर के रहेगा और इसके लिए यदि ताकत का इस्तेमाल करना पड़ा तो वह भी करेगा। शी ने जोर देकर कहा कि ताईवान के अनसुलझे मसले को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक ट्रान्सफर करने का सिलसिला ख़त्म होना चाहिए। ताईवान, जो सन् १९४९ में गृहयुद्ध के दौरान चीन से अलग हुआ था, स्वयं को लोकतांत्रिक स्व-शासित राष्ट्र कहता है। लेकिन चीन का नजरिया अलग है। चीन के पूर्व विदेशमंत्री क्विन गैंग, जो अब लापता हैं, ने इस साल के शुरू में कहा था कि ताईवान स्ट्रेट के दोनों ओर की ज़मीन चीन की है और जो “ताईवान की आग से खेल रहे हैं वे उसमें अपनी अंगुलियां जलाएंगे”।
चीन अपना दबदबा बनाए रखने के लिए ताईवान स्ट्रेट में और ताईवान के आकाश में लगातार और बार-बार सैनिक अभ्यास करता रहता है। पिछले साल अमेरिका के हाउस ऑफ रिप्रेजेन्टेटिव्स की तत्कालीन स्पीकर नैन्सी पैलोसी की बहुचर्चित ताईवान यात्रा के बाद चीन ने ताईवान के आसपास के इलाके की ओर कई मिसाईलें छोड़ीं थीं। अमेरिका चीन पर कई बार यह आरोप लगा चुका है कि चीन उसके हवाईजहाजों और पानी के जहाजों के आसपास खतरनाक युद्धाभ्यास करता रहता है जिससे जहाजों उया हवाईजहाजों में आपस में टक्कर होने और नतीजे में दोनों महाशक्तियों की भिड़ंत का खतरा बढ़ता है। चीन ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि उसने ताईवान को अरबों डालर के हथियार बेचने का वायदा कर उसे बारूद के ढेर पर बिठा दिया है।
अमेरिका ने जिस पैकेज की घोषणा की है उसमें ३४.५० करोड़ डालर के हथियार और गोला बारूद के साथ ही सैन्य शिक्षण और ट्रेनिंग भी शामिल हैं। सैन्य सहायता की राशि और बढ़ सकती है क्योंकि अमेरिका के रक्षा मंत्री लॉयड आस्टिन ने कहा है कि उनका इरादा कांग्रेस द्वारा मंज़ूर की गयी एक अरब डालर की पूरी राशि का उपयोग ३० सितंबर को वित्त वर्ष समाप्त होने के पहले करने का है।
इस नए घटनाक्रम ने पहले से किए जा रही कोशिशों पर पानी फेर दिया है। एक ओर बाइडन प्रशासन अपने वरिष्ठ आधिकारिक और गैर-आधिकारिक प्रतिनिधियों को चीन भेजकर दोनों देशों के बीच का तनाव कम करने का प्रयास कर रहा है वहीं दूसरी ओर ड्रेगन को उसी के पिछवाड़े में चुनौती देकर भड़का रहा है।



