काठमांडू,३० जून। नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को एक अंतरिम आदेश देते हुए उससे समलैंगिक विवाह के अस्थायी पंजीकरण को कहा। न्यायालय के एक नोटिस में यह जानकारी दी गई। न्यायमूर्ति तिल प्रसाद श्रेष्ठ की एकल पीठ ने सरकार को आदेश जारी किया कि यदि यौन और लैंगिक अल्पसंख्यक जोड़े मांग करते हैं तो उनके विवाह को पंजीकृत करने के लिए आवश्यक व्यवस्था करें।
आदेश में शीर्ष अदालत ने विरोधियों से इस मुद्दे पर १५ दिन के भीतर लिखित जवाब देने को भी कहा है। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि उन्होंने रिट याचिका दायर की है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद नेपाली कानून ने समलैंगिक विवाह में बाधा डाली है।
याचिकाकर्ताओं ने समलैंगिक विवाह को वैध बनाने की मांग करते वक्त राष्ट्रीय नागरिक संहिता २०१७ के खंड ६९ (१) का हवाला देते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक को शादी करने की स्वतंत्रता है और नेपाली संविधान २०१५ के खंड १८ (१) के अनुसार कानून की नजर में सभी नागरिक समान हैं।
आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने डेढ़ दशक पहले एक आदेश के माध्यम से समलैंगिक विवाह की अनुमति दी थी, लेकिन एक विशिष्ट कानून के अभाव में यह प्रावधान लागू नहीं हो सका, जिसके कारण तीसरे लिंग के लोगों को अदालत में जाने के लिए मजबूर होना पड़ा।



