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श्रीलंका ने आपातकाल की घोषणा की, कर्फ्यू लगाया

कोलंबो,३० जुलाई। श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने देश के आर्थिक संकट पर कई दिनों के हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद आपातकाल की घोषणा कर दी है। सरकार ने कर्फ्यू भी लगा दिया है और व्यवस्था बहाल करने के प्रयास में सड़कों पर सैनिकों को तैनात कर दिया है।
विरोध प्रदर्शन शनिवार, २२ जुलाई को शुरू हुआ, जब सरकार ने घोषणा की कि वह ईंधन की कीमतों में १५% की वृद्धि करेगी। पिछले वर्ष में गैसोलीन की कीमत अब दोगुनी हो गई है, और डीजल की कीमत तीन गुना हो गई है। इससे लोगों के लिए यात्रा करना मुश्किल हो गया है और भोजन और अन्य आवश्यक चीजों की भी कमी हो गई है।
हाल के दिनों में विरोध प्रदर्शन तेजी से हिंसक हो गया है। मंगलवार, २५ जुलाई को प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने राजधानी कोलंबो में राष्ट्रपति कार्यालय पर धावा बोल दिया। पुलिस ने आंसू गैस और रबर की गोलियों से जवाब दिया और कई लोगों के घायल होने की खबरें आईं।
आपातकाल की स्थिति सरकार को बिना किसी आरोप के लोगों को हिरासत में लेने और सभा की स्वतंत्रता को प्रतिबंधित करने की व्यापक शक्तियाँ देती है। कर्फ्यू रात ९ बजे से सुबह ५ बजे तक लागू है।
सरकार ने कहा है कि आपातकाल की स्थिति “आवश्यक आपूर्ति और सेवाओं के रखरखाव को सुनिश्चित करने” और “सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखने” के लिए आवश्यक है। हालाँकि, आलोचकों ने सरकार पर असहमति को कुचलने के लिए आपातकालीन शक्तियों का उपयोग करने का आरोप लगाया है।
गौरतलब है कि श्रीलंका में आर्थिक संकट देश के इतिहास में सबसे खराब है। सरकार अपना कर्ज़ चुकाने के लिए संघर्ष कर रही है और देश को विदेशी मुद्रा की कमी का सामना करना पड़ रहा है। इससे भोजन, दवा और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कमी हो गई है।
विरोध प्रदर्शन सरकार के संकट से निपटने के तरीके पर गहरे असंतोष का संकेत है। यह देखना बाकी है कि क्या आपातकाल की स्थिति व्यवस्था बहाल करने में सक्षम होगी, या क्या यह केवल विरोध प्रदर्शनों को और भड़काएगी।

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