नई दिल्ली, १७ जनवरी। भारत सरकार ने एक बार फिर विंडफॉल टैक्स बदलाव किया है। इस बार सरकार ने विंडफॉल टैक्स में कटौती की है। कच्चे तेल, डीजल और जेट फ्यूल पर विंडफॉल टैक्स को घटाया गया है। घरेलू बाजार में उत्पादित कच्चे तेल पर विंडफॉल टैक्स को २०० रुपये प्रति टन घटाकर १९०० रुपए प्रति टन कर दिया गया है पहले ये २१०० रुपए प्रति टन था। वहीं जेट फ्यूल (एटीएफ) पर १ रुपये प्रति लीटर की कटोती की है। अब एटीएफ ३.५ रुपए प्रति लीटर हो गया है पहले इसका दाम ४.५ रुपए प्रति लीटर था।
डीजल पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में डेढ़ रुपये की कटौती की गई है। अब ये ६.५ रुपए प्रति लीटर से घटकर ५ रुपए प्रति लीटर हो गया है। पेट्रोल पर किसी तरह का टैक्स नहीं लगेगा। पहले भी पेट्रोल निर्यात पर किसी तरह का टैक्स नहीं लगता था।
इससे पहले २ जनवरी को विंडफॉल टैक्स में प्रति टन के हिसाब से ४०० रुपये की बढ़त की गई थी। यानी घरेलू स्तर उत्पादित हुए कच्चे तेल पर विंडफॉल टैक्स १७०० रुपए प्रति टन से बढ़ाकर २१०० रुपए प्रति टन कर दिया गया था।
वहीं डीजल एक्सपोर्ट पर १.५ रुपए की बढ़ोतरी हुई थी, पहले ये ड्यूटी ५ रुपए की लगती थी, जिसे बढ़ाकर ६.५ रुपए कर दिया गया। इसके अलावा एटीएफ पर इसे ३ रुपए प्रति लीटर बढ़ाया गया था।
विंडफॉल टैक्स घटने से तेल कंपनियों को फायदा होगा। आज रिलायंस, ओएनजीसी, गेल इंडिया, ऑयल इंडिया जैसी कंपनियों के स्टॉक में एक्शन दिख सकता है।
विंडफॉल टैक्स ऐसी कंपनियों या इंडस्ट्री पर लगाया जाता है, जिन्हें किसी खास तरह की परिस्थितियों में इमिडिएट रूप से काफी लाभ होता है। भारत की तेल कंपनियां इसका अच्छा उदाहरण हैं. यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया। इससे तेल कंपनियों को काफी फायदा मिला था। रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण तेल कंपनियां भारी मुनाफा काट रही थीं, इसलिए उन पर विंडफॉल टैक्स लगाया गया था। भारत ही नहीं इटली और यूके ने भी अपनी एनर्जी कंपनियों पर यह टैक्स लगाया था।



