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३७० हटाने को सही ठहराने की याचिका खारिज, सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी-हम ऐसी घोषणा नहीं की कर सकते

नई दिल्ली, २२ अगस्त । सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें यह घोषणा करने की मांग की गई थी कि राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद ३७० को निरस्त करना और अनुच्छेद ३५ए को हटाना वैध और संवैधानिक था। भारत के मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने याचिका को गलत धारणा करार दिया और कहा कि इस तरह की घोषणा शीर्ष अदालत द्वारा जारी नहीं की जा सकती है, खासकर जब संवैधानिक वैधता का प्रश्न पहले से ही सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष लंबित है। सीजेआई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायधीशों की संविधान पीठ २०१९ के राष्ट्रपति के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है, इसमें पूर्ववर्ती राज्य जम्मू और कश्मीर को दी गई विशेष स्थिति को छीन लिया गया है और इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किया गया है।
शीर्ष अदालत के समक्ष दायर एक हलफनामे में, केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर की विशेष स्थिति को रद्द करने का बचाव करते हुए कहा है कि अनुच्छेद ३७० को कमजोर करने के उसके फैसले से क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास, प्रगति, सुरक्षा और स्थिरता आई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा कि आतंकवादियों और अलगाववादी नेटवर्क द्वारा सड़क पर की जाने वाली हिंसा अब अतीत की बात हो गई है और आतंकवाद-अलगाववादी एजेंडे से जुड़ी संगठित पथराव की घटनाएं, जो २०१८ में १,७६७ तक थीं २०२३ में आज तक शून्य पर आ गईं।

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