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Modi holds meeting with economists amid global challenges

मोदी ने वैश्विक चुनौतियों के बीच अर्थशास्त्रियों के साथ की बैठक

नयी दिल्ली, १४ जनवरी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नीति आयोग में प्रसिद्ध अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों के साथ विशेष रूप से आयोजित बैठक में भाग लिया और चुनौतीपूर्व वैश्विक वातारण में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि और मजबूती के तमाम पहलुओं पर चर्चा की।
बैठक के बाद जारी नीति आयोग की विज्ञप्ति में कहा गया है, विचार-विमर्श ‘वैश्विक प्रतिकूल परिस्थितियों के बीच भारत का विकास और दृढ़ता’ विषय पर आधारित था। अपनी टिप्पणी में, प्रधानमंत्री ने कहा कि जहां जोखिम थे, वहीं उभरता हुआ वैश्विक वातावरण डिजिटलीकरण, ऊर्जा, स्वास्थ्य देखभाल और कृषि जैसे क्षेत्रों में नए और विविध अवसर प्रदान करता है।
विज्ञप्ति के अनुसार श्री मोदी ने कहा कि इन अवसरों का लाभ उठाने के लिए, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र को तालमेल का लाभ उठाने और लीक से हटकर सोचने की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने भारत डिजिटल की सफलता की गाथा और देश भर में फिनटेक को तेजी से अपनाने, और समावेशी विकास और इसके दृढ़ संकल्प की क्षमता की सराहना की।
प्रधानमंत्री ने नारी शक्ति को भारत के विकास के प्रमुख इंजन के रूप में चिह्नित किया और कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी को और सक्षम बनाने के साथ-साथ उसे बढ़ावा देने के लिए प्रयास जारी रखने का आग्रह किया। मौजूदा अंतरराष्ट्रीय पोषक अनाज वर्ष में, प्रधानमंत्री ने कार्बन न्यूट्रल, प्राकृतिक खेती के अनुकूल और पोषण के किफायती स्रोत जैसी विशेषताओं के साथ ग्रामीण और कृषि क्षेत्र को बदलने की उनकी क्षमता को देखते हुए मोटे अनाज (ज्वार-बाजार आदि) को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र संघ ने वर्ष २०२३ को अंतरराष्ट्रीय मिलेट़स वर्ष घोषित किया है।
नीति आयोग की विज्ञप्ति में कहा गया है कि बैठक में शामिल प्रतिभागियों ने उन तरीकों पर व्यावहारिक उपायों की पेशकश की, जिनसे भारत अपने विकास की गति को विवेकपूर्ण ढंग से बनाए रख सकता है। कृषि से लेकर विनिर्माण तक विविध विषयों पर प्रधानमंत्री के साथ विचार और सुझाव साझा किए गए।
बयान के मुताबिक बैठक में यह स्वीकार करते हुए कि अंर्तनिहित वैश्विक प्रतिकूलताएं जारी रहने की संभावना है, भारत की दृढ़ता को और मजबूत करने के लिए रणनीतिक सिफारिशें भी साझा की गईं। इस बात पर सहमति कायम हुई कि अपने जुझारूपन के कारण, भारत अशांत वैश्विक मंच पर एक आशा की किरण बन कर उभरा है। प्रतिभागियों ने सुझाव दिया गया था कि सभी क्षेत्रों में समग्र विकास के माध्यम से इस नींव पर नए सिरे से विकास पर जोर देने की आवश्यकता होगी।
प्रधानमंत्री ने अर्थशास्त्रियों को उनके विचारों के लिए धन्यवाद दिया और उन्हें अपने परिवर्तनकारी विचारों को लगातार साझा करके राष्ट्र के विकास में सहायता करने के लिए प्रेरित किया।
बैठक में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, योजना राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) राव इंद्रजीत सिंह, नीति आयोग के उपाध्यक्ष डा सुमन बेरी और कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे। बैठक में शंकर आचार्य, शमिका रवि और अशोक गुलाटी और कई अन्य अर्थशास्त्रियों ने भाग लिया।

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