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अतीत और भविष्य के मोह में जाती जान

टाइटैनिक के डूबने के बाद से समुद्र में कई त्रासदियां हो चुकी हैं। टाइटन की दुर्घटना के कुछ ही दिन पहले ७५० प्रवासियों को ले जा रही मछली पकडऩे की एक नौका भूमध्य सागर में डूब गई थी। इसमें सवार लोगों में से ज्यादातर पाकिस्तानी और अफगान थे और वे सब इटली जा रहे थे। इस जहाज की डेक के नीचे १०० बच्चे थे। इस दुर्घटना में कितने लोग मारे गए यह अभी साफ नहीं है। पिछले कुछ सालों में इस तरह की कई नावें और जहाज डूब चुके हैं। इन दुर्घटनाओं में सैकड़ों प्रवासी मारे गए और सैकड़ों गायब हैं। परंतु न तो पश्चिमी मीडिया, न वहां की सरकारों और ना ही वहां के लोगों ने कभी इन दुर्घटनाओं को उतनी तवज्जो दी जितनी कि पांच रईस सैलानियों की मौत को दी है। समुद्र में डूबे प्रवासियों को ढूंढऩे की कोशिश बहुत अनमने ढंग से की गई जबकि कुबेरपति पर्यटकों की खोज में जमीन-आसमान एक कर दिया गया। प्रवासियों को उनकी मौत के लिए खुद जिम्मेदार ठहराया जाता है। हमें मीडिया यह नहीं बताता कि उनके परिवारों की बदहाली, गरीबी और भूख के चलते वे मजबूर होकर छोटी-छोटी नावों में समंदर के रास्ते अपने स्वर्ग की तलाश में निकलते हैं। इसके विपरीत इन पांच रईसों के शोक में मानों पूरी दुनिया दु:खी थी। जिंदगी में तो गैरबराबरी है ही, मौत में भी गैर-बराबरी है।
हर जान कीमती होती है। और हर मौत दिल तोडऩे वाली। परंतु जो लोग आजादी और पेट भर रोटी की तलाश में जान गंवा देते हैं उनकी त्रासदी उन लोगों से कहीं अधिक गंभीर है जो केवल अपनी रोमांचक यात्राओं की सूची में एक और नाम जोडऩे के लिए खतरे उठाते हैं।
इस बात की संभावना बहुत कम है कि समुद्र के तल पर बिखरे इतिहास के अवशेषों की तलाश में इस तरह की दुर्घटना अगले कुछ सालों में फिर से हो। परंतु बेहाल प्रवासियों से भरी नावें डूबती रहेंगीं। अगर एटलांटिक महासागर के तल में सपनों का जहाज है तो भूमध्य सागर भी सपनों की कब्रगाह बन चुका है। सन् २०१४ से लेकर अब तक इसमें २५,००० लोग डूबकर मर चुके हैं।
निर्देशक जेम्स केमरून ने कहा है कि अवशेष हमें कहानियां सुनाते हैं और हमें हमारे बारे में कुछ बताते हैं। इन दोनों त्रासदियों ने हमें आईना दिखाया है। एक ओर है अतीत के प्रति आकर्षण के वशीभूत हो फफूंद से ढंके टाईटेनिक के अवशेषों को छूने की इच्छा। दूसरी ओर है समुद्र के गर्भ में आज समा रहे लोग।
टाईटेनिक के प्रति मोह के कारण होने वाली त्रासदियों को अब और नहीं होने देना नहीं चाहिए। टाईटेनिक डूब चुका है।उसे हमें अब भुलाकर आगे बढऩा चाहिए।

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