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ख़ालिस्तान समर्थकों ने भारतीय मूल के लोगों और हिंदुओं को कैनेडा छोड़ने की दी धमकी

ब्रैम्पटन,२० नवंबर। १८ नवम्बर की कहानी शुरू होती है, भारतीय कोंसलेट जनरल कार्यालय टोरोंटो द्वारा १२ ऑक्टोबर को भेजी गयी एक प्रेस रिलीज़ से। इस प्रेस रिलीज़ के अनुसार भारतीय कोंसलेट १८ और १९ नवमबर को भारतीय पेंशन लाभार्थियों को ‘लाइफ़ सर्टिफिकेट’ दिया जाना था। इसका समय था सुबह १० बजे से दोपहर २.३० तक।

प्रेस रिलीज़ के अनुसार १८ नोवेम्बर को इन्हें ‘सिक्ख हेरिटेज सेंटर ब्रैंपटन, १९ नोवेम्बर को ब्रैंपटन के त्रिवेणी मंदिर तथा मिस्सिस्सौग़ा के हिंदू हेरिटेज सेंटर से दिया जाना था। याद रहे कि यह ‘लाइफ़ सर्टिफिकेट’ भारतीय कोंसलेट जनरल कार्यालय टोरोंटो द्वारा हर वर्ष ‘कोंसलेट आपके द्वार’ कार्यक्रम के तहत दिए जाते हैं।

१७ नोवेम्बर को हमें २ ऑन लाइन पोस्टर मिलते हैं। पहले ऑन लाइन पोस्टर में भारतीय हाई कमिश्नर संजय कुमार वर्मा और टोरोंटो के नव नियुक्त कोंसलेट जनरल सिद्धार्थ नाथ सिंह को ‘कैनेडा में इंडियन टेरर’ का फ़ेस बताया जाता है। इसके साथ ही इस ‘पोस्ट’ में भारतीय कांसुलेट द्वारा आयोजित किए जाने वाले ‘लाइफ़ सर्टिफिकेट’ केम्प को ‘शट डाउन / बंद करने की बात कही जाती है।

यह पोस्ट सीधे तौर पर ‘ख़ालिस्तान समर्थकों’ को सम्बोधित है। जिसमें उनसे कहा गया है कि “ क्या तुम शहीद निज्जर के हत्यारे ‘इंडियन स्पाई नेट्वर्क’ द्वारा ‘‘लाइफ़ सर्टिफिकेट’ देने को अलाउ / जारी रखने दोगे।” इस पोस्ट में भारतीय हाई कमिश्नर संजय कुमार वर्मा और टोरोंटो के नव नियुक्त कोंसलेट जनरल सिद्धार्थ नाथ सिंह के फ़ोटो भी लगाए गए हैं।

दूसरी पोस्ट हमें मिलती है जिसे विश्व हिंदु परिषद के कैनेडा चैप्टर, ‘हिंदु कम्यूनिटी ओफ़ कैनेडा’ द्वारा भेजा गया है। इस पोस्ट में ‘ख़ालिस्तानी प्रदर्शन’ के विरोध में एक ‘पीस प्रोटेस्ट यानी शांति पूर्वक विरोध की बात कही गयी है। इस पोस्ट में अपने समर्थकों से कैनेडियन और रिलीजियस झंडो को लाने की बात कही गयी है। इसमें यह भी कहा गया है कि ‘ चलो हम सभी हर तरह की नफ़रत फैलाने के ख़िलाफ़ खड़े होते हैं और ‘प्रेम और शांति का संदेश देते हैं। वर्ल्ड इज वन फ़ैमिली’ / पूरी दुनियाँ एक परिवार है।

दोनों ही तरफ़ की पोस्ट में दिए गए समय के अनुसार आपका हिंदी टाइम्स सुबह ९ बजे ‘सिक्ख हेरिटेज सेंटर’ पहुँच गया था। सिक्ख हेरिटेज सेंटर का पूरा पार्किंग लॉट, भरा हुआ था। प्रौढ़ और बुजुर्ग पुरुष और महिलाएँ अपने बेटे – बेटियों और पोते – पोतियों के साथ ‘लाइफ़ सर्टिफिकेट’ के लिए आ रहे थे। हमने ऐसे ही एक अभ्यर्थी भारतीय सेना के पूर्व मेजर से भी बात की।

क़रीब ९.३० पर ख़ालिस्तान समर्थक झंडो और डंडो के साथ आता है। उनसे उनके प्रदर्शन का कारण पूछने पर वो हम पर भारत सरकार के ‘जासूस’ होने का आरोप लगाते हैं। साथ ही वे भारत के झंडे निकाल कर अपने पैरों तले रौंदते हुए गाली गलौज करना शुरू करते हैं। कुछ ही देर में इन ख़ालिस्तान समर्थकों की तादाद बढ़ कर क़रीब ३५-४० हो जाती है। इसी बीच वीएचपी के कैनेडा चैप्टर के मुखिया श्री महेंद्र भंडारी और उनके १ साथी वहाँ पहुँचते हैं और उनके सामने भी भारत के झंडे को रौंदा जाता है और उनसे बद सलूकी की जाती है।

कैनेडा की फ़्रीडम ओफ़ स्पीच यानी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का महादुरुपयोग करने वाले ये आतंकवादी अपनी कार से घर जाने वाले हर व्यक्ति को भारत के झंडे के ऊपर से जाने को मजबूर कर रहे थे. जैसे ही कार चालक अपनी गाड़ी बढ़ाते तुरंत ये पहियों के नीच भारत का झंडा लगा देते।

इसी बीच पील रीजन की पुलिस भी वहाँ पहुँचती है। ख़ालिस्तान समर्थक बराबर भारत और हिंदुओं वपस जाओ के नारे लगा रहे थे। इनमे से अपने चेहरे पर मास्क लगाए एक युवक हिंदी भाषियों , ‘यू पी और बिहारियों’ के ख़िलाफ़ अपशब्द कहता है। सभी ख़ालिस्तनिय समर्थकों के चेहरे पर अजब सी क्रूरता नज़र आ रही थी। उनके तेवरों से इतना तय था कि अगर वहाँ पुलिस नहीं आयी होती तो हिंदू भारतीय होने के नाम पर हमारे ऊपर हमला अवश्यंभावी था।

भारत से ख़ालिस्तान की माँग करने वाले ये तथाकथित ख़ालिस्तानी और कुछ भी हों लेकिन इन्हें गुरु नानक से लेकर गुरु गोबिंद सिंह का सिख तो नहीं ही कहा जा सकता। सभी ख़ालिस्तान समर्थक भारत और हिंदुओं के लिए इतनी गालियाँ और अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर रहे थे कि उसे मीडिया में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता, लेकिन हमारे द्वारा म्यूट किए जाने पर भी आप इंसानियत और भारत के दुश्मनों की गिरी हुई मानसिकता का स्तर समझ सकते हैं।

अब आते हैं १९ नवम्बर पर। बावजूद इसके कि इन ख़ालिस्तानियों ने हिंदू हेरिटेज सेंटर और त्रिवेणी मंदिर में पेंशन प्राप्तकर्ताओं को भारत सरकार द्वारा दिए जा रहे ‘लाइफ़ सर्टिफिकेट’ को रोकने की बात अपने ऑन लाइन पोस्ट में कही थी। लेकिन सिक्ख हेरिटेज सेंटर पर हुए हंगामे के बाद इन दोनों मंदिरों ने अपने यहाँ पुलिस की व्यवस्था कर ली थी। जिसके कारण इन भारत विरोधी तत्वों की वहाँ जाने की हिम्मत तक पड़ी।

इन भारत विरोधी तत्वों को भारत और कैनेडा के सम्बंध को ज़रा भी नहीं सुहाते। हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के मामले में कैनेडियन प्रधानमंत्री द्वारा संसद में भारत पर बिना सबूत के आरोप लगाने के बाद इन तत्वों का हौसला बढ़ गया है। सवाल है कि कैनेडा की धरती पर भारत के झंडे और हिंदुओं का अपमान करने वाले इन ख़ालिस्तानियों के झंडे का भी अगर भारत समर्थक और हिंदु समर्थक लोगों ने अपमान किया तो क्या कैनेडा में हिंसा का एक नया दौर नहीं शुरू हो जाएगा…? शायद इसीलिए आम शांति प्रिय जनता इन ख़ालिस्तानी ख़ुराफ़ातियों के हिंसक तेवर से आशंकित है। इन हिंसक तत्वों का कैनेडा के सभी स्तरों के पुलिस प्रशासन को शमन / न्यूट्रीलाइज करना होगा। कैनेडा एक दूसरे एयर इंडिया कनिष्क को विस्फोट से उड़ाने का इंतज़ार नहीं कर सकता।

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