बीसी, १९ जनवरी। भारतीय पंजाबी डायस्पोरा के स्थानीय समुदाय के नेता इस बात पर जोर दे रहे हैं कि पंजाब के अंतर्राष्ट्रीय छात्र खतरनाक दर ड्रग्स के ओवरडोज के कारण मर रहे हैं खासकर सरे में। लेकिन सरकार इस समस्या को ट्रैक करने की बजाय इसे नजरअंदाज कर रही है।
गुरुद्वारे के अध्यक्ष ज्ञानी नरिंदर सिंह के अनुसार सरे में गुरुद्वारा दुख निवारण ने भारतीय पंजाबी अंतर्राष्ट्रीय छात्रों के शवों को भारत वापस लाने में मदद करने के लिए सैकड़ों हजारों डॉलर खर्च किए हैं। जो रिपोर्टस प्राप्त हुई है उसमें से ८०% मौतें ड्रग से संबंधित हैं।
ड्रग्स के ओवरडोज़ से मरने वालों के करीबी अक्सर लोगों को बताते हैं कि छात्रों की नींद में या कार्डियक अरेस्ट से मृत्यु हो गई जबकि सच कुछ और होता है। समुदाय के अन्य प्रमुख लोगों की राय है कि कैनेडा में आने के इच्छुक अन्य संभावित अंतर्राष्ट्रीय छात्रों को हतोत्साहित न करने के लिए सरकार डेटा जारी नहीं कर सकती है।
इस बारे में बीसी कोरोनर्स सर्विस ने कहा कि डेटा उपलब्ध नहीं है क्योंकि सेवा नशीली दवाओं से संबंधित ओवरडोज से होने वाली मौतों पर नस्ल-आधारित आंकड़े एकत्र नहीं करती है। प्रवक्ता रयान पैंटन ने कहा कि हम मृतकों की जातीयता से संबंधित डेटा एकत्र नहीं करते हैं क्योंकि वर्तमान में ऐसी जानकारी के लिए कोई प्रांतीय मानक नहीं है।
गुरु नानक फूड बैंक के सचिव और परिचालन प्रमुख नीरज वालिया का कहना है कि सरकार को इसे स्वीकार करने की जरूरत है और उन्हें संख्या दिखाने की जरूरत है कि ड्रग्स ही कारण है तभी समाधान निकलेगा। एक और बात जो सामने आई है वह यह है कि इन ड्रग्स का सेवन कर रहे कुछ छात्र जानते हैं कि वे कुछ ऐसा ले रहे हैं जो उनके शरीर को प्रभावित कर सकता है लेकिन हेरोइन, फेंटेनाइल , बेंजोडायजेपाइन और अन्य पदार्थों के बीच अंतर के बारे में पूरी तरह से नहीं जानते हैं। दोस्त या सहकर्मी के कहने पर लोग इनका सेवन तो कर लेते हैं पर बाद में यही उनके मौत का कारण बन जाती है।



