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Ethanol-Distillery

भारतीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की एथनॉल जुटाने की तैयारी

नई दिल्ली, २५ अक्टूबर।

तेल विपणन कंपनियों ने १ नवंबर से शुरू हो रहे २०२३-२४ आपूर्ति वर्ष में सभी स्रोतों से ८.२३ अरब लीटर एथनॉल की आपूर्ति के लिए निविदा जारी की है, जो १५ प्रतिशत एथनॉल मिलाने के जरूरी है।

बोली दस्तावेज कुछ दिन पहले जारी हुए और बोली की वैधता ३१ जुलाई, २०२४ तक के लिए है। आधिकारिक दस्तावेज में कहा गया है, ‘विभिन्न स्रोतों जैसे गन्ने के रस, चीनी, चीनी के शीरे/बी हैवी मोलैसिस/सी हैवी मोलैसिस, खराब हो गए अनाज, मक्के, एफसीआई से मिले अतिरिक्त चावल से उत्पादित एथनॉल और उनकी मात्रा का बोली फॉर्म में दी गई है। बोली लगाने वाले को निर्धारित अवधि में निर्धारित कुल मात्रा की आपूर्ति करनी होगी।’

२०२२-२३ में ओएमसी ने ६.५१ लाख लीटर एथनॉल आपूर्ति के लिए निविदा मांगी थी, जिसमें से जुलाई के अंत तक करीब ३.५१ अरब लीटर की आपूर्ति हुई है। इसमें से करीब ८२ प्रतिशत गन्ने से जुड़े एथनॉल व शेष अनाज से बने एथनॉल की आपूर्ति हुई।

सूत्रों ने कहा कि २०२२-२३ के दौरान १२ प्रतिशत मिश्रण का लक्ष्य था, जबकि कुछ सप्ताह पहले तक ११.७६ प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया जा चुका है। आधिकारिक योजना के मुताबिक भारत ने २०२३-२४ आपूर्ति वर्ष में १५ प्रतिशत मिश्रण का लक्ष्य रखा गया है। २०२४-२५ तक १८ प्रतिशत और २०२५-२६ आपूर्ति वर्ष तक २० प्रतिशत एथनॉल मिलाने की योजना है।

ट्रूअल्ट बायोएनर्जी के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक विजय निरानी ने कहा, ‘२०२५ तक एथनॉल उद्योग ५०० प्रतिशत बढ़ेगा क्योंकि हम २० प्रतिशत मिश्रण के स्तर की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसे में मांग बढ़कर १०.१६ अरब लीटर हो जाएगी। इससे यह उद्योग ९,००० करोड़ रुपये से बढ़कर ५०,००० करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा।’

उद्योग और व्यापार से जुड़े सूत्रों ने हाल में कहा, ‘केंद्र सरकार गन्ने के शीरे से बनने वाले एथनॉल की कीमत २०२३-२४ सीजन के लिए१ से ३ प्रतिशत तक बढ़ा सकती है, जैसा कि पिछले कुछ साल से होता आ रहा है।’ इसकी अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

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