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India is a big example among countries discussing arms purchases

हथियारों की खरीद पर चर्चा करने वाले देशों में भारत बड़ा उदाहरण

न्यूयॉर्क, १९ जनवरी। पेंटागन के प्रवक्ता पैट राइडर का कहना है कि भारत एक बड़ा उदाहरण है जिससे अमेरिका हथियारों की खरीद पर चर्चा कर रहा है ताकि दूसरे देशों को रूस से दूर किया जा सके।
उन्होंने वाशिंगटन में एक ब्रीफिंग में कहा, अमेरिका समझ गया है कि रूसी या सोवियत युग के हथियार खरीदने वाले कुछ देश मास्को के साथ संबंध बनाए रखना चाहते हैं।
उन्होंने कहा, सुरक्षा सहयोग के दृष्टिकोण से और निश्चित रूप से अमेरिका के दृष्टिकोण को देखते हुए मुझे लगता है कि क्षमताओं को शामिल करने के लिए अमेरिका द्वारा प्रदान की जाने वाली सुरक्षा सहायता कहीं अधिक भरोसेमंद हैं।
उन्होंने कहा, हम दुनिया भर के विभिन्न भागीदारों और सहयोगियों के साथ चर्चा करना जारी रखेंगे कि क्या उन्हें इस प्रकार की प्रणालियों को खरीदना चाहिए। इसके लिए भारत एक महान उदाहरण है।
राइडर ने ये टिप्पणियां दक्षिण अफ्रीका के रूस और चीन के साथ संयुक्त नौसैनिक अभ्यास और वाशिंगटन द्वारा प्रिटोरिया के साथ साझा की गई जानकारी से जुड़े एक सवाल के जवाब में की।
उन्होंने कहा कि रक्षा सहयोग देशों के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय है।
स्टॉकहोम पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के अनुसार, भारत अपनी डिफेंस सोर्सिंग में बदलाव ला रहा है। २०१६ और २०२१ के बीच अमेरिका से खरीदारी दस गुना बढ़ गई है।
संस्थान के अनुसार, रूस से भारत का हथियारों का आयात पिछले पांच साल की अवधि की तुलना में ४७ प्रतिशत कम हो गया है।
अमेरिका के लिए एक दुविधा यह है कि भारत द्वारा एस-४०० मिसाइल रक्षा प्रणाली जैसे कुछ हथियारों की खरीद इसे प्रतिबंधों के लिए उत्तरदायी बनाती है और इसने अब तक प्रतिबंधों को रोक रखा है।
दूसरी ओर, भारत भी यूक्रेन युद्ध में अपने हथियारों के प्रदर्शन के कारण रूस से लगातार हथियार खरीदने को लेकर दुविधा का सामना कर रहा है।

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