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ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते।

ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते।

सङ्गात्संजायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते॥

अर्थात् – विषय-वस्तुओं के बारे में सोचते रहने से मनुष्य को उनसे लगाव हो जाता है। इससे उनमें कामना यानी इच्छा पैदा होती है और कामनाओं में बाधा आने से क्रोध की उत्पत्ति होती है। इसलिए प्रयास करें कि किसी वस्तु के मोह से दूर रहते हुए कर्म में लीन रहा जाए।

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