नई दिल्ली, ०६ जुलाई । सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को २००२ के गुजरात दंगों में कथित तौर पर झूठे सबूत गढऩे से संबंधित एक मामले में कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ की अंतरिम सुरक्षा की अवधि बढ़ा दी। जस्टिस बी.आर. गवई, ए.एस. बोपन्ना और दीपांकर दत्ता की पीठ ने गुजरात राज्य द्वारा स्थगन के अनुरोध के बाद नोटिस जारी करते हुए सीतलवाड़ की जमानत याचिका पर आगे की सुनवाई १९ जुलाई को दोपहर २ बजे तय की।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के साथ गुजरात की तरफ से पेश हुए। उन्होंने ने कहा कि अदालत के समक्ष अतिरिक्त दस्तावेज और उनका अनुवाद दाखिल करने के लिए कुछ और समय की आवश्यकता है।
शीर्ष अदालत गुजरात उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता सीतलवाड़ की अपील पर सुनवाई कर रही थी जिसमें उन्हें नियमित जमानत देने से इनकार कर दिया गया था। उच्च न्यायालय ने राज्य पुलिस द्वारा २००२ के गुजरात दंगों के मामले में उच्च सरकारी अधिकारियों को फंसाने के लिए झूठे दस्तावेज तैयार करने का आरोप लगाते हुए दर्ज की गई एक प्राथमिकी के संबंध में उन्हें तुरंत आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था।
इससे पहले, शनिवार (१ जुलाई) को देर शाम बुलाई गई विशेष बैठक में शीर्ष अदालत ने गुजरात उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाते हुए उन्हें गिरफ्तारी से एक सप्ताह की राहत दी थी। सीतलवाड़ पिछले साल सितंबर से अंतरिम जमानत पर हैं। गुजरात उच्च न्यायालय ने शनिवार को उनकी जमानत याचिका खारिज करने के बाद तुरंत आत्मसमर्पण करने के लिए कहा था।
सीतलवाड को २५ जून २०२२ को अहमदाबाद डिटेक्शन ऑफ क्राइम ब्रांच (डीसीबी) द्वारा दर्ज एक एफआईआर के आधार पर गुजरात पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उनके खिलाफ आरोपों में २००२ के गुजरात दंगों के सिलसिले में निर्दोष व्यक्तियों को फंसाने की साजिश रचना शामिल है। सात दिनों की पुलिस रिमांड के बाद उसे २ जुलाई को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।



