ओटावा। वै जिसमें ५५ से अधिक देशों के मंदिर और सामुदायिक संगठन और कैनेडा भर के ११५ मंदिर इस शुभ अवसर को मनाने के लिए एक साथ आए हैं।
कैनेडा में लगभग सभी मंदिर इस ऐतिहासिक अवसर पर कार्यक्रमों का आयोजन कर रहे हैं। इन मंदिरों में भारत कल्चरल सोसायटी ऑफ अल्बर्टा, कैलगरी, रामायण भजन मंडली कैलगरी, चिन्मय मिशन कैलगरी, श्री अनघा दत्त सोसायटी ऑफ कैलगरी, श्री सत्य साईंबाबा केंद्र कैलगरी, बीएपीएस श्री स्वामीनारायण मंदिर, कैलगरी, गायत्री परिवार कैलगरी,हिंदू सोसायटी ऑफ कैलगरी,
इस्कॉन मंदिर – कैलगरी , हिंदू मलयाली संगठन कैलगरी, सनातन हिंदू सांस्कृतिक समाज कैलगरी, भारतीय कल्चरल सोसायटी ऑफ अलबर्टा एडमंटन, शिरडी साईं बाबा मंदिर (आध्यात्मिक ध्यान केंद्र) एडमंटन, इस्कॉन वैंकूवर, हिंदू मंदिर बर्नाबी (वैंकूवर), मुरुगन मंदिर रिचमंड, वैदिक कल्चरल सोसायटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया रिचमंड, लक्ष्मी नारायण मंदिर सरे, मंगलम मंदिरम वैंकूवर, हिंदू मंदिर और डॉ. राज पांडे हिंदू केंद्र विनिपेग , हिंदू मंदिर हैलिफ़ैक्स , हिंदू मंदिर – वेदांत आश्रम सोसायटी हैलिफ़ैक्स एन एस , इस्कॉन हैलिफ़ैक्स ,कृष्णा हिंदू संस्था नोवा स्कोटिया, हिंदू मंदिर वेदांत आश्रम सोसायटी नोवा स्कोटिया हैलिफ़ैक्स, जय दुर्गा हिंदू सोसायटी स्कारबोरो टोरंटो ,भारत माता मंदिर , ब्रैम्पटन, चिन्मय मिशन ब्रैम्पटन, गौरी शंकर मंदिर ब्रैम्पटन, गुरुवायुरप्पन मंदिर ब्रैम्पटन, हिंदू सभा मंदिर-गोर रोड ब्रैम्पटन, इस्कॉन ब्रैम्पटन, माँ चिंतपूर्णी मंदिर ब्रैम्पटन,राधा माधव मंदिर, डिक्सी रोड, ब्रैम्पटन, श्री बाबा बालक नाथ मंदिर , ब्रैम्पटन, त्रिवेणी मंदिर ब्रैम्पटन, ब्रैंटफ़ोर्ड हिंदू मंदिर ब्रैंटफ़ोर्ड , गुरुमंदिर, एटोबिकोक, श्रृंगेरी विद्या भारती फाउंडेशन एसवीबीएफ एटोबिकोक , हैमिल्टन मंदिर ऑफ हिंदू सोसायटी हैमिल्टन, राम धाम मंदिर किचनर, चिन्मय मिशन लंदन , हिंदू सांस्कृतिक केंद्र लंदन , आर्य समाज मार्खम ,सनातन मंदिर सांस्कृतिक केंद्र मार्खम, टोरंटो आर्य समाज मार्खम ,इस्कॉन मिल्टन , हिंदू विरासत केंद्र मिसिसॉगा , राम मंदिर मिसिसॉगा, टोरंटो कालीबाड़ी मिसिसॉगा और इस्कॉन मस्कोका आदि शामिल हैं जहां विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किया जा रहे हैं।
अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में भगवान राम की प्रतिमा के प्राण प्रतिष्ठा के समारोह का जश्न मनाने वाले इस महोत्सव में दुनिया भर के भक्त विभिन्न तरीकों से भाग ले रहे हैं। विश्व हिंदू परिषद ने एक अपील जारी करते हुए बताया है कि आप इसका हिस्सा कैसे बन सकते हैं:
छुट्टी लें और उत्सव

में डूब जाएं: वीएचपी सभी को उत्सव के दिन काम से छुट्टी लेने और उत्सव में पूरी तरह से डूब जाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। आज का दिन पूरी तरह से प्रभु को समर्पित कर दें और भक्ति भाव में लीन हो जाएं।
स्थानीय मंदिरों द्वारा आयोजित समारोहों में शामिल हों: विश्व हिंदू परिषद ने अनुरोध किया है कि अपने निकटतम मंदिर का पता लगाएं और इस अवसर पर उनके अनूठे उत्सव कार्यक्रमों में शामिल हों। वहां होने वाले अनुष्ठानों, भक्ति भजनों और सांस्कृतिक प्रदर्शनों के साक्षी बनें जो आपको दिव्य ऊर्जा से भर देंगे।
भोजन वितरण के सा
थ खुशियाँ फैलाएँ: हिंदू संगठनों से आग्रह किया गया है कि वे इस अवसर का आशीर्वाद कम भाग्यशाली लोगों के साथ साझा करते हुए, पास के मंदिरों में भोजन वितरण का आयोजन करें। धर्म शास्त्रों में भी कहा गया है कि भूखे को भोजन कराना और अन्न प्रसादम् का वितरण करना किसी भी धार्मिक व सांस्कृतिक आयोजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए।
प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में ऑनलाइन भागीदारी करें और इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनें: प्रभु श्री राम जी के प्राण प्रतिष्ठा समारोह को टेलीविजन या बड़े स्क्रीन पर देखने की व्यवस्था की जाए। यह सुनि
श्चित करते हुए कि हर कोई इस महत्वपूर्ण अवसर का हिस्सा बन सके।
राम दीयों से रात को रोशन करें: जैसे ही शाम ढले, उत्सव की भावना से घरों को रोशन करें। दीपावली के दीयों की याद दिलाते हुए राम दीये जलाएं और इस शुभ अवसर पर हर ओर प्रकाश और खुशियां फैलाएं।
अपने सनातनी पड़ोसियों को प्रेरित करें: अपने सनातनी पड़ोसियों के साथ अपने उत्साह को साझा करें। उन्हें उत्सव में भाग लेने और हिंदू धर्म की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अनुभव करने के लिए आमंत्रित करें।
रजिस्टर करें और अपना उत्सव साझा करें: इस वैश्विक उत्सव का हिस्सा बनने के लिए, लोगों को वीएचपी द्वारा उपलब्ध कराए गए लिंक का उपयोग करके पंजीकरण करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। अपने उत्सव के सार को एक शॉर्ट वीडियो या रील में कैप्चर करें और निर्दिष्ट लिंक का उपयोग करके इसे अपलोड करें। अपनी खुशी साझा करें और दूसरों को उत्सव में शामिल होने के लिए प्रेरित करें।
श्री रामलला प्राण प्रतिष्ठा उत्सव एक ऐसा ऐतिहासिक कार्यक्रम है, जो दुनिया भर के करोड़ों हिंदुओं की आस्था, भक्ति और सांस्कृतिक गौरव को प्रदर्शित करता है। विश्व हिंदू परिषद ने आग्रह किया है कि ५०० वर्षों की प्रतिष्ठा के बाद आए इस पल के साक्षी अवश्य बनें!



