आढ् यतो वापि दरिद्रो वा दुःखित सुखितोऽपिवा ।धर्म / February 14, 2024 February 14, 2024 आढ् यतो वापि दरिद्रो वा दुःखित सुखितोऽपिवा । निर्दोषश्च सदोषश्च व्यस्यः परमा गतिः ॥ अर्थात्:- चाहे धनी हो या निर्धन, दुःखी हो या सुखी, निर्दोष हो या सदोष – मित्र ही मनुष्य का सबसे बड़ा सहारा होता है।