आयुः कर्म च विद्या च वित्तं निधनमेव च।
पञ्चैतानि विलिख्यन्ते गर्भस्थस्यैव देहिनः॥
अर्थात् जीवन, कर्म, विद्या, धन और मृत्यु, ये पांच वस्तुएँ गर्भस्थ बच्चे के द्वारा ही निश्चित की जाती हैं॥
यह श्लोक हमें बताता है कि जीवन, कर्म, विद्या, धन और मृत्यु जैसी पांच वस्तुएँ हमारे जीवन के आदर्श मूल्यों के साथ जुड़ी होती हैं। इन्हें हम अपने जीवन में संतुलित रूप से स्वीकार करना चाहिए। विद्या इस संदर्भ में एक महत्वपूर्ण तत्व है जो हमें सही रास्ता दिखा सकती है और सफलता की ओर अग्रसर कर सकती है।



