नई दिल्ली, 31 अक्टूबर। रमा एकादशी का विशेष महत्व है। रमा एकादशी को व्रत और पूजन करने से जाने-अनजाने में हुए हर तरह के पाप नष्ट हो जाते हैं। पद्म पुराण में इस व्रत के महत्व का वर्णन किया गया है। दीपावली के चार दिन पहले आने वाली एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु के साथ लक्ष्मीजी की पूजा भी की जाती है। इसलिए इसे रमा एकादशी कहते हैं, जो कि लक्ष्मीजी का एक नाम है।
कई जगहों पर इस दिन से ही लक्ष्मी पूजन का प्रारंभ हो जाता है और दीपावली पर महापूजा की जाती है। मान्यता है कि इस एकादशी व्रत से ब्रह्महत्या जैसे महापाप भी दूर हो जाते हैं। इस बार यह एकादशी एक नवंबर, सोमवार को है। इस व्रत के प्रभाव से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। सौभाग्यवती स्त्रियों के लिए यह व्रत सुख और सौभाग्य देने वाला माना गया है।
रमा एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर नहाएं और पूजा के साथ व्रत का संकल्प लें। इस व्रत में बिना कुछ खाए पिए या फिर एक समय फलाहार किया जा सकता है। सुबह भगवान विष्णु और लक्ष्मीजी की पूजा करें। भगवान को भोग लगाएं और प्रसाद बांट दें। तुलसी और पीपल के पेड़ की पूजा भी करनी चाहिए। फिर ब्राह्मण भोजन करवाना चाहिए।
इस एकादशी पर तुलसी, आंवले और पीपल के पेड़ की पूजा करने की भी परंपरा है। कार्तिक महीना होने से इस व्रत का महत्व और बढ़ जाता है। इस दिन इन तीनों पेड़-पौधों की पूजा करने से कई यज्ञों को करने का पुण्य मिलता है। इस एकादशी पर दीपदान भी किया जाता है। इस दिन तुलसी, आंवले और पीपल के पेड़ सहित मंदिरों और नदी, तालाबों के किनार दीपदान करने से हर तरह के पाप खत्म हो जाते हैं।
पुराणों के मुताबिक रमा एकादशी व्रत से कामधेनु और चिंतामणि के समान फल मिलता है। इस व्रत को करने से समृद्धि और संपन्नता बढ़ती है। इस व्रत से लक्ष्मीजी प्रसन्न होती हैं। पद्म पुराण का कहना है कि रमा एकादशी व्रत करने से भगवान विष्णु की कृपा भी प्राप्त होती है। जिसके प्रभाव से हर तरह के पाप नष्ट हो जाते हैं और मृत्यु के बाद विष्णु लोक में स्थान प्राप्त होता है।



