ओटावा, 16 सितंबर। कोरोना महामारी के खिलाफ दुनियाभर में जंग जारी है। इसके बावजूद कोरोना हारने का नाम नहीं ले रहा है। कोरोना के खिलाफ वैक्सीन को सबसे बड़ा हथियार माना जा रहा है। दुनिया भर में करोड़ों लोगों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है कुछ देशों में कोरोना की बूस्टर डोज देने की भी तैयारी की जा रही है। इस बीच माडर्ना की कोरोना वैक्सीन को लेकर एक नया अध्ययन सामने आया है। इसमें पाया गया है कि वैक्सीन से मिलने वाली कोरोना के खिलाफ सुरक्षा समय के साथ कम हो जाती है। इसलिए बूस्टर डोज की जरूरत की बात कही गई है।
कोरोना के खिलाफ वैक्सीन सबसे बड़ा हथियार है। कोरोना वैक्सीन से मिलने वाली सुरक्षा कितने समय तक रहती है इसको लेकर दुनियाभर में बहस जारी है। इस बीच माडर्ना ने कहा है कि उसकी वैक्सीन का प्रभाव समय के साथ कम हो जाता है ऐसे में बूस्टर डोज की आवश्यकता है।
माडर्ना ने यह बात ताजा अध्ययन के आधार पर कही है, जिसे बुधवार को सबके सामने रखा गया। माडर्ना के अध्यक्ष स्टीफन होज ने कहा कि यह सिर्फ एक अनुमान है। लेकिन आशंका है कि सुरक्षा कम होने की वजह से 600,000 कोविड केस अधिक देखने पड़ सकते हैं। होज ने यह नहीं बताया कि इसमें गंभीर केस कितने होंगे। लेकिन यह दावा किया कि हास्पिटल में मरीजों की संख्या बढ़ सकती है।
कोरोना का डेल्टा वैरिएंट इस समय पूरी दुनिया के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। अध्ययनों में दावा किया जा रहा है कि वैक्सीन लेने वाले लोगों में कोरोना के इस घातक वैरिएंट का खतरा कम हो सकता है, हालांकि कौन सी वैक्सीन डेल्टा वैरिएंट पर ज्यादा असरदार है, इसको लेकर अब भी शोध जारी है। इसी से संबंधित, यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) ने अपने हालिया अध्ययन में बताया कि डेल्टा वैरिएंट्स से सुरक्षा देने में फाइजर और जॉनसन एंड जॉनसन वैक्सीन के मुकाबले माडर्ना की वैक्सीन ज्यादा असरदार हो सकती है।



