नई दिल्ली। ब्रिक्स देशों के सहयोग से ग्रीन हाइड्रोजन पहल पर 22 व 23 जून को होने वाले शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए भारत ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। ब्रिक्स में ब्राजील, रूस, भारत, चीन व दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। आधिकारिक बयान के अनुसार, वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम का संचालन देश की सबसे बड़ी ऊर्जा उत्पादक कंपनी नेशनल थर्मल पावर कारपोरेशन (एनटीपीसी) लिमिटेड करेगी।
सम्मलेन के पहले दिन प्रत्येक राष्ट्र के प्रतिनिधि हाइड्रोजन के उपयोग और उनकी भविष्य की योजनाओं पर देश की तरफ से की गई पहल को साझा करेंगे। कार्यक्रम के वक्ता हाइड्रोजन पर विकसित विभिन्न तकनीकों की प्रासंगिकता तथा अपने देश के लिए इनकी प्राथमिकताओं को भी साझा करेंगे। दूसरे दिन विभिन्न देशों द्वारा समग्र ऊर्जा नीति ढांचे में हाइड्रोजन को एकीकृत करने के विचारों पर पैनल चर्चा होगी। बता दें कि अक्षय ऊर्जा का उपयोग करके इलेक्ट्रोलाइसिस द्वारा उत्पादित हाइड्रोजन को ग्रीन हाइड्रोजन के रूप में जाना जाता है। इसमें कार्बन का कोई अंश नहीं होता है।
ब्रिक्स देशों का ग्रुप बनाने की शुरुआत जुलाई, 2006 में G-8 आउटरीच शिखर सम्मेलन के मौके पर रूस, भारत और चीन के नेताओं की बैठक में हुई। सितंबर, 2006 में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के मौके पर ब्राजील, रूस, भारत और चीन यानी ब्रिक्स ग्रुप के विदेश मंत्रियों की पहली बैठक हुई और इसे फॉर्मल ग्रुप बनाया गया। BRIC का पहला शिखर सम्मेलन रूस के येकातेरिनबर्ग शहर में 16 जून, 2009 को हुआ। साल 2010 में दक्षिण अफ्रीका को इस ग्रुप में शामिल किया गया। इसके बाद BRIC ग्रुप साउथ अफ्रीका (S) जुड़ने के बाद BRICS बन गया। भारत ने 2012 और 2016 में BRICS सम्मेलन की मेजबानी की है।
इन पांच देशों के आर्थिक मुद्दों से शुरुआत करते हुए ब्रिक्स का एजेंडा साल दर साल बढ़ा है। इसमें हर साल वैश्विक मुद्दे शामिल किए गए हैं। इन देशों के प्रमुखों की मीटिंग के अलावा वित्त, व्यापार, स्वास्थ्य, विज्ञान और टेक्नोलॉजी के मंत्रियों के साथ भी बैठकें होती रहती हैं।



