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इजराइली हमलों से तबाह गाजा रोटी-रोटी को मोहताज, यूएन ने की निंदा

जिनेवा । गाजा पर इजराइल द्वारा किया जा रहा हमला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी कड़ी में इजराइल ने गाजा में खाद्य प्रणाली को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया है, जिसकी वजह से अब वहां लोग भूखे मरने की कगार पर आ चुके हैं। इजराइल के इस कदम की संयुक्त राष्ट्र संघ ने आलोचना की है। यूएन ने गाजा में जारी भूखमरी को रोकने का आग्रह किया है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के ५५वें सत्र में विशेष दूत माइकल फाखरी ने कहा कि इजराइली बमबारी में गाजा के १५ फीसद अधिक मत्स्य पालन क्षेत्र तबाह हो चुके हैं।
वहीं, एक विशेषज्ञ ने कहा कि इजराइल ने गाजा में रहने वाले फिलिस्तीनियों के खिलाफ ‘भूखमरी अभियान’ चलाया है। इस अभियान के अंतर्गत इजराइल लगातार गाजा के मत्स्य पालन क्षेत्र को निशाना बना रहा है।
उन्होंने कहा कि ७ अक्टूबर २०२३ से इजराइल ने सभी समुद्री मार्गों को बंद कर दिया है।
उन्होंने कहा, इजराइली सैनिकों ने गाजा के सभी बंदरगाहों और मत्स्य पालन के सभी ठिकानों को भी नेस्तनाबूत कर दिया। रफा में ४० में से अब दो नाव ही सुरक्षित बचे हैं। खान यूनिस में इजराइल ७५ फीसद से भी अधिक मत्स्य पालन के क्षेत्रों को तबाह कर चुका है।
फाखरी ने कहा कि एन्क्लेव में मछली पकडऩे की आजीविका के विनाश ने गाजा में लोगों के लिए भोजन के अधिकार को कमजोर कर दिया है और उन्हें भूख और भुखमरी में धकेल दिया है।
संयुक्त राष्ट्र ने मंगलवार को इजराइली सैनिकों के हमले की निंदा की थी। दरअसल, सैनिकों ने बीते २९ फरवरी को गाजा के दक्षिण-पश्चिमी में आटा लेने के लिए एकत्रित हुए फिलिस्तीनियों पर हमला कर दिया था। इस हमले की जद में आकर ११२ लोग मारे गए थे। वहीं, ७६० बुरी तरह जख्मी हो गए थे।

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