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“यथा ह्येकेन चक्रेण न रथस्य गतिर्भवेत् !

“यथा ह्येकेन चक्रेण न रथस्य गतिर्भवेत् !

एवं परुषकारेण विना दैवं न सिद्ध्यति।।”

अर्थ- बिना परिश्रम के भाग्य भी सिद्ध नहीं होता। यह ठीक वैसे ही है जैसे, रथ या गाड़ी बिना एक पहिया के नहीं चल सकती।

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