सिंगापुर । सिंगापुर में भारतीय मूल के सैन्यकर्मी ने नाबालिग के साथ यौन संबंध बनाने की कोशिश के मामले में अपना गुनाह कबूल कर लिया है। रिपोर्ट के अनुसार, सुब्रमण्यम थबुरन रंगासामी की १ फरवरी को होने वाली सजा के दौरान दो अन्य आरोपों पर भी विचार किया जाएगा। वहीं, पीड़िता की पहचान पर रोक लगाने का आदेश है, जो अब १७ साल की है। जब वह १५ साल की थी तो सुब्रमण्यम ने पीड़िता के साथ यौन संबंध बनाने की कोशिश की थी।
उप लोक अभियोजक सुनील नायर ने कहा कि घटना ०६ दिसंबर, २०२१ को स्कूल की छुट्टियों के दौरान हुई। पीड़िता की सुबह ११ बजे अपने स्कूल काउंसलर के साथ ऑनलाइन मीटिंग होनी थी, लेकिन वह प्राइवेसी को देखते हुए घर की बजाय एक बहुमंजिला कारपार्क में चली गई।
कार पार्क की चौथी मंजिल पर आरोपी सुब्रमण्यम अपनी मोटरसाइकिल पर काम के लिए निकलने का इंतजार कर रहा था। हालांकि, इस बीच पीड़िता सीढिय़ों से गिर जाती है, और जोर से चिल्लाने लगती है। आवाज सुनकर सुब्रमण्यम सीढिय़ों के पास पहुंचता है और पीड़िता की मदद करता है। इसके बाद दोनों कारपार्क की चौथी मंजिल की सीढ़ी पर बैठ जाते है और बातें करने लगते है। करीब एक घंटे बाद सुब्रमण्यम और लड़की यौन संबंध बनाने की कोशिश करते है, लेकिन विफल हो जाते है। दोनों के बीच फोन नंबर एक्सचेंज होता है और बातचीत बढ़ जाती है।
कोर्ट में बताया गया कि दोनों के बीच व्हाटसएप पर बात होने लगी, लेकिन कोई भी मैसेज यौन प्रकृति के नहीं थे। हालांकि, घटना के दो दिन बाद ०८ दिसंबर, २०२१ को पीड़िता ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई क्योंकि उसे लगा कि सुब्रमण्यम ने उसका फायदा उठाया है। अभियोजक ने कहा कि आरोपी को कभी भी पीड़िता की उम्र को लेकर गुमराह नहीं किया गया और उसने पीडिता पर यौन संबंध बनाने के लिए दबाव नहीं डाला।
प्रथम वारंट अधिकारी सुब्रमण्यम को उनकी गिरफ्तारी के बाद सभी कार्यों से निलंबित कर दिया गया है। सिंगापुर दैनिक ने मंत्रालय के एक प्रवक्ता के हवाले से कहा, ‘एसएएफ अदालती सुनवाई के समापन पर आगे की कार्रवाई शुरू करेगा, जिसमें उसे सेवा से बर्खास्त करना भी शामिल हो सकता है।’
उन्होंने कहा कि एसएएफ अपने सैनिकों को अनुशासन और सत्यनिष्ठा के उच्च मानकों पर रखती है और अपराध करने वालों से कानून के अनुसार निपटा जाएगा। १६ साल से कम उम्र की नाबालिग के साथ यौन संबंध बनाने पर सुब्रमण्यम को १० साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।



