इस दिन वे अवतीर्ण हुए थे
जग कर्ता स्वयमेव
देने उज्ज्वल संदेश
स्वतः बन आये नानक देव!
ईश्वर की सन्तानें हम सब
कोई ऊँच न नीच
जगती का उद्धार कराने जाति – धर्म के कीच।
सच्चा सौदा सिर्फ़ एक ही
प्रभु सिमरण जप-नाम
सत् श्रीअकाल’ शुचि मंत्र परम से होते सारे काम।
कोटि-कोटि वंदन अभिनंदन
अक्षर कीर्ति ललाम
साहिब के गुरु-ग्रंथ रूप को
सौ-सौ बार प्रणाम!



