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इज़राइल हमास युद्ध में रूस और चीन की खुशी

इज़राइल के प्रति पुतिन की उदासीनता से बहुत कुछ जाहिर होता है। लंबे समय से नेतन्याहू उर्फ बीबी और पुतिन अच्छे दोस्त रहे हैं, उनके बीच घनिष्ठता रही है, वे एक-दूसरे के प्रशंसक हैं। पिछले दो दशकों से इज़राइल की राजनीति के केन्द्र में रहे बीबी को मोदी और पुतिन जैसे चौड़े सीने वाले नेता भाते हैं। दूसरी ओर पुतिन, इज़राइल को अपना रुआब दिखाने में न झिझकने वाली एक क्षेत्रीय ताकत के रूप में पसंद करते हैं। और रूस में दम तोड़ते लोकतंत्र के प्रति नेतन्याहू की उदासीनता भी उन्हें माफिक आती है।
बीबी पिछले वर्षों में रूस की एक दर्जन यात्राएं कर चुके हैं और इस दौरान यूक्रेन-रूस युद्ध के सन्दर्भ में उन्होंने न तो रूस के ख़िलाफ़ एक शब्द कहा और ना ही यूक्रेन की हथियार देकर मदद की। इसलिए जब पुतिन ने हमास के हमले के बाद नेतन्याहू से फोन पर बात करने में पूरे नौ दिन लगा दिए तो सभी को बहुत अचरज हुआ।
यह कोई छुपी बात नहीं है कि रूस फिलिस्तीन राष्ट्र का समर्थक रहा है, उसने फिलिस्तीनी लड़ाकों को प्रशिक्षण दिया और उन अरब देशों को हथियार दिए जिनने १९७३ में इज़राइल पर हमला किया था। रूस सीरिया के तानाशाह बशर अल असद का भी समर्थन करता है और उसके ईरान से हमेशा से अच्छे रिश्ते रहे हैं। वह साईप्रस के भी नज़दीक आ गया है, तुर्की की ओर भी दोस्ती का हाथ बढ़ा रहा है और इजिप्ट से भी रिश्ते बेहतर कर रहा है।
वहीं, चीन ने भी हमास की निंदा नहीं की है जिससे इज़राइल को कुछ ढांढ़स बंधता। एक खबर के मुताबिक ग़ाज़ा में घुसने की तैयारी कर रही हथियारों से लैस इज़रायली सेना और टकराव के क्षेत्र की ओर बढ़ते अमरीकी युद्धपोतों की तस्वीरें एकसाथ प्रकाशित कर चीनी समाचार माध्यम यह धारणा उत्पन्न करने का प्रयास कर रहे हैं कि यह सब वाशिंगटन के नेतृत्व में हो रहा है। और बेल्ट एंड रोड सम्मेलन में शी जिन पिंग ने अमरीकी नेतृत्व के विकल्प के रूप में अपने देश को प्रस्तुत किया और व्लादिमीर पुतिन को भी एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने का मौका दिया।
इज़राइल और हमास के बीच टकराव की ओर दुनिया का ध्यान केन्द्रित होने से जहाँ क्रेमलिन खुश है वहीं बीजिंग अमरीका की प्रतिष्ठा गिरने और उसके प्रभाव को चुनौती दिए जाने से प्रसन्न है। हालांकि इजराइल और ईरान समर्थक किसी अन्य संगठन के बीच यदि एक बड़ी जंग छिड़ती है तो मास्को और बीजिंग दोनों के लिए मुश्किलें बढ़ जाएंगी। और दुनिया शायद दो हिस्सों में बंट जाए।

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