नई दिल्ली,१६ अगस्त। भारत में स्वच्छता और साफ-सफाई को बढ़ावा देने के लिए काम करने वाली सामाजिक सेवा संस्था सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक बिंदेश्वर पाठक का मंगलवार को एम्स-दिल्ली में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वह ८० वर्ष के थे ।
पाठक एक दूरदर्शी व्यक्ति थे जिन्होंने अपना जीवन गरीबों और हाशिए पर रहने वाले लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोगों को किफायती, स्वच्छ शौचालय उपलब्ध कराने के लक्ष्य के साथ १९७० में सुलभ इंटरनेशनल की स्थापना की। उन्होंने मैला ढोने की प्रथा को ख़त्म करने के लिए भी काम किया।
पाठक के काम का भारत में स्वच्छता पर बड़ा प्रभाव पड़ा। उन्होंने लाखों शौचालय बनाने और सैनिटरी नैपकिन के उपयोग को मुख्यधारा में लाने में मदद की। उन्होंने मैला ढोने वालों के अधिकारों और खुले में शौच के मैदानों को बंद करने के लिए भी अभियान चलाया।
पाठक को २००९ में भारत के तीसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान, पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। वह निक्केई एशिया पुरस्कार, रेमन मैग्सेसे पुरस्कार और विश्व शौचालय संगठन के सर्वोच्च सम्मान, विश्व शौचालय पुरस्कार के भी प्राप्तकर्ता थे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाठक के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि वह एक दूरदर्शी व्यक्ति थे जिन्होंने सामाजिक प्रगति और वंचितों को सशक्त बनाने के लिए बड़े पैमाने पर काम किया। उन्होंने कहा कि पाठक ने स्वच्छ भारत के निर्माण को अपना मिशन बनाया। उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन को महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया।



