नई दिल्ली ,१२ अगस्त । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को लोकसभा में १८६० में बने आईपीसी, १८९८ में बने सीआरपीसी और १८७२ में बने इंडियन एविडेंस एक्ट को गुलामी की निशानी बताते हुए इन तीनों विधेयकों की जगह लेने वाले तीन नए विधेयकों – भारतीय न्याय संहिता विधेयक-२०२३, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता विधेयक-२०२३ और भारतीय साक्ष्य विधेयक २०२३ को पेश किया। शाह के अनुरोध पर तीनों बिलों को स्टैंडिंग कमेटी को भेज दिया गया है।
शाह ने इन तीनों बिलों को सदन में पेश करते हुए कहा कि ब्रिटिश काल में अंग्रेजों की संसद द्वारा बनाए गए कानूनों का उद्देश्य दंड देना था जबकि इन तीनों बिलों का उद्देश्य न्याय देना है। उन्होंने कहा कि इसमें राजद्रोह के प्रावधान को खत्म कर दिया गया है, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा का खास ध्यान रखा गया है, नाम बदल कर यौन शोषण करने वालों के खिलाफ सजा का प्रावधान किया गया है, दोषियों की संपत्ति कुर्की का प्रावधान किया गया है, सजा माफी को लेकर भी नियम बनाया गया है। पुलिस, अदालत और वकीलों की जवाबदेही सुनिश्चित की गई है।
उन्होंने भारतीय न्यायिक व्यवस्था और दंड व्यवस्था में आमूल चूल बदलाव का दावा करते हुए कहा कि चार साल के गहन विचार विमर्श के बाद ये तीनों बिल लाये गए हैं। शाह ने इस पर और ज्यादा विचार विमर्श करने के लिए इन्हें स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजने का प्रस्ताव भी रखा जिसे सदन ने स्वीकार कर लिया।



