संदेह नहीं है कि नेतन्याहू ने देश के भीतर और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इजराइल की बेहतरी और उसकी छवि सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। वे स्वयं को हर राजनीतिक घटनाक्रम के केन्द्र में रखने में सफल रहे हैं, कई बार जिसका सन्देश यह था कि इजराइल और तबाही के बीच वे अकेले खड़े हैं। लेकिन कल के घटनाक्रम से वे इजराइल को तबाही के कगार पर ले आए हैं। बिगड़ती सेहत से जूझ रहे ७३ वर्षीय नेतन्याहू नेसेट आने के पहले पेसमेकर लगवाने के लिए अस्पताल में थे।
वे अपने गठबंधन सहयोगियों को मतदान टालने के लिए राजी नहीं कर सके। इससे यह संकेत मिलता है कि उनका प्रभाव कम हो चला है और वे अपनी राजनीतिक विश्वसनीयता खो चुके हैं। कहना मुश्किल है कि वे गठबंधन के सबसे घोर राष्ट्रवादी और धार्मिक कट्टरपंथी दलों को न्यायिक सुधारों के ज़रिये और अन्य तरीकों से उनका राजनैतिक एजेंडा आगे बढ़ाने से रोक सकेंगे। आखिर उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले भी चल रहे हैं।
इजराइल में इस साल ठंड तीखी थी और वसंत, नीरस। प्रदर्शकारी अपनी बात पर जमे हुए हैं। नेतन्याहू के गठबंधन साथी भी दृढ़ हैं। ऐसे में दोनों के बीच जबरदस्त टकराव तय है जो इजराइल में गर्मी के मौसम को और ज्यादा गर्म और तूफानी बनाएगा। जहां तक प्रधानमंत्री नेतन्याहू का प्रश्न है, वे अभी अपनी सत्ता कायम रखने में भले ही कामयाब रहे हों उन्हें आज के बाद से इजराइल में तबाही लाने के लिए याद किया जाएगा। देश के इतिहास में एक ऐसा नया दौर प्रारंभ हो गया है, जो खूनखराबे से भरा और त्रासद हो सकता है।



