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मौसम का बदलता व्यवहार

उत्तर भारत के लोगों को मौसम में बदलते और असामान्य मिजाज का अहसास इस समय जरूर हो रहा होगा। जुलाई के पहले हफ्ते में भीषण बारिश हुई, उससे हुए नुकसान का अभी अंदाजा ही लगाया जा रहा है। जबकि इस बीच अब असामान्य गर्मी और उमस ने उनकी जिंदगी मुहाल कर दी है। लेकिन ऐसा सिर्फ उन्हें झेलना पड़ रहा हो, ऐसी बात नहीं है। बल्कि सारी दुनिया का यही हाल है। दुनियाभर में इस महीने गर्मी के कई सारे रिकार्ड्स टूट गए हैं। अमेरिकी एजेंसी नासा ने कहा है कि रिकॉर्ड रखना शुरू होने के बाद से अब तक का सबसे गर्म महीना यही जुलाई होगा।
साफ है, जलवायु परिवर्तन के भयानक परिणाम दिखने शुरू हो गए हैं। दुनियाभर में भीषण गर्मी, बाढ़, बेमौसम बरसात जैसी घटनाएं आम हो चुकी हैं।
इसी बीच वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि जुलाई २०२३ संभवत: हजारों वर्षों में दुनिया का सबसे गर्म महीना रहेगा। यूरोपीय संघ और कुछ दूसरे स्रोतों से मिले डेटा के मुताबिक ऐसे रोजाना के कई रिकार्ड्स तो पहले ही टूट चुके हैं। पहले कुछ प्राकृतिक घटनाओं के कारण असामान्य मौसम होता था। लेकिन अब बात वह नहीं है।
मसलन, फिलहाल मौसम पर दिख रहे प्रभावों को केवल एल-नीनो पैटर्न का परिणाम नहीं ठहराया जा सकता है। बेशक, एल-नीनो भी इसमें एक छोटी भूमिका निभा रहा है, लेकिन देखने में यह आ रहा है कि लगभग हर जगह असाधारण गर्मी है। निर्विवाद रूप से इसका कारण वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों को लगातार बढ़ते रहना है। तापमान बढऩे का असर यूरोप से लेकर एशिया, अफ्रीका और अमेरिका तक में साफ साफ नजर आया है। इसके परिणामस्वरूप कहीं भारी सूखा है, तो कहीं बाढ़ और कहीं वैसी बरसात, जिसके बारे में बुजुर्गों का कहना है कि उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी में ऐसा नहीं देखा। चीन में भी कुछ जगहों पर तापमान ने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। कई देशों की सरकारों को गर्मी से होने वाले खतरों के लिए चेतावनी जारी करनी पड़ी है। लेकिन ऐसी फौरी चेतावनियां अब कारगर होने वाली नहीं हैं। दरअसल दुनिया ने वैज्ञानिकों की जलवायु परिवर्तन संबंधी चेतावनियों को नजरअंदाज किया। उसका नतीजा अब सामने है।

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