इज़राइली सुरक्षा बलों ने वेस्ट बैंक के जेनिन शहर में रीफ्य़ूजी-कैंप पर अब तक के सबसे बड़े हमलों में से एक किया। यह सन् २००२ के बाद से इज़राइल की सेना का वेस्ट बैंक के किसी फिलीस्तीनी शहर पर सबसे बड़ा हमला था।
जेनिन शरणार्थी शिविर फिलिस्तीन के सबसे पुराने शिविरों में से एक है। आधे वर्ग किलोमीटर से भी कम जगह के इस शिविर में करीब १८,००० लोग रहते हैं। यहां वे फिलिस्तीनी बसे हुए हैं जिन्हें इजराइल के अस्तित्व में आने के बाद देश से निकाल दिया गया था। यह फिलिस्तीन की धरती पर पिछले ५५ साल से जारी इजरायली कब्जे की खिलाफत का केन्द्र रहा है। यह इलाका गरीबी, अपराध और बेरोजगारी सहित कई समस्याओं से जूझ रहा है और और यहां की संकरी गलियों में इजरायली सेना और फिलीस्तिनी उग्रवादियों के बीच गोलबारी की घटनाएं आम हैं।
जेनिन न केवल इजरायल की सेना के वेस्ट बैंक पर कब्जे के खिलाफ सन् १९६७ से जारी फिलिस्तीनी प्रतिरोध के लिए जाना जाता है बल्कि यह फिलिस्तीन के ८७ वर्षीय राष्ट्रपति महमूद अब्बास के भ्रष्ट एवं जिद्दी शासन के नतीजों का नमूना भी है। महमूद को इजराइल के प्यादे के रूप में देखा जाता है। इस बात की बहुत कम सम्भावना है कि निकट भविष्य में फिलिस्तीन के सुरक्षा बल जेनिन पर फिर से अपना वर्चस्व स्थापित कर पाएंगे।
अब तक वेस्ट बैंक में हिंसा केवल जेनिन तक सीमित है और खून खराबा , जंग में तब्दील नहीं हुआ है। परन्तु फिलिस्तीनियों का मानना है कि नेतन्याहू की अति-दक्षिणपंथी सरकार के आदेश पर इजराइल की सेना जेनिन में लड़ाकू हेलीकाप्टरों और ड्रोनों सहित घातक हथियारों का इस्तेमाल कर रही है। और जेनिन में बेचैनी, गुस्सा और असंतोष बढ़ता जा रहा है।



