इसमें कोई संदेह नहीं है कि रिपब्लिकन पार्टी का राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनने की सबसे अधिक सम्भावना यदि किसी की है तो वे ट्रंप हैं। उन्हें अपनी पार्टी में समर्थन हासिल है। जाहिर है कि अगले १८ महीनों में ट्रंप अनेक रैलियों को संबोधित करेंगे और अपने भाषणों में वे उनके खिलाफ चल रहे मुकदमे और उनकी सुनवाईयों की बात ज़रूर करेंगे। क्या इन मुकदमों से व्हाइट हाउस का किरायेदार एक बार फिर बनने के ट्रंप के सपने को ग्रहण लग सकता है? ऐसा शायद ही हो। अमेरिका में भी अदालती कार्यवाहियां कछुआ चाल से चलतीं हैं और इसलिए इस बात की बहुत कम सम्भावना है कि नवम्बर २०२४ के पहले वे जेल पहुँच जाएँ।
परन्तु एक बात तो है। उन पर आपराधिक आरोप लगाए जाने से भले की प्राइमरीज में उन्हें फायदा मिले परन्तु राष्ट्रीय चुनाव में जब वे बाइडन के सामने होंगे, तब यह उनके लिए समस्या बन सकती है। जो वोटर अतिवादी नहीं हैं वे बतौर राष्ट्रपति ट्रंप के व्यवहार से पहले ही नाराज़ हैं और जब ट्रंप अपने को षडय़ंत्रपूर्वक प्रताडि़त करने वालों को नेस्तनाबूद करने की बातें करेंगे तब वे उन्हें सर्वोच्च पद के लायक मानेंगे इसकी सम्भावना कम ही है।
हाँ अपने ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ मतदाताओं के बीच वे खासे लोकप्रिय हैं। कुछ लोगों को यह आशंका भी है यह नारा एक नए विद्रोह का सबब बन सकता है। अमरीका की राजनैतिक और कानूनी संस्थाओं और उसके प्रजातंत्र को अगले कुछ महीनों में ‘स्ट्रेस टेस्ट’ का सामना करना पड़ेगा।



