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कैनेडा में खालिस्तानियों की परेड को लेकर विवाद गहराया, भड़के एस जयशंकर ने रिश्तों को लेकर कह दी बड़ी बात!

ब्रैम्पटन, ०९ जून। ब्रैम्पटन में खालिस्तान समर्थकों द्वारा निकाली गई परेड को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। खास तौर पर कैनेडियन सरकार की ओर से लगातार खालिस्तानियों को दी जा रही ढील और संवेदनशील मुद्दों पर भारत के ऐतराज के बावजूद सकारात्मक प्रतिक्रिया न देने से दोनों देशों के रिश्ते में खटास आ गई है।
आपको बता दें कि ब्रैम्पटन में ३ जून को एक परेड में सिख अंगरक्षकों द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या को दर्शाने वाली झांकी दिखाई गई। खालिस्तानियों द्वारा निकाली गई इस परेड में एक पोस्टर लगा था, जिसमें लिखा था ‘बदला’ और खालिस्तान का झंडा भी लगा था।
इस घटना को लेकर भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने साफ लहजे में कहा कि यह भारत और कैनेडा के बीच रिश्तों के साथ-साथ खुद कैनेडा के लिए भी ठीक नहीं है। उन्होंने इसे वोट बैंक की राजनीति करार दिया है।
उन्होंने इसे राजनीति करार देते हुए कहा कि सच कहूं तो हम यह समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर कोई ऐसा क्यों करेगा। अलगाववादियों, चरमपंथियों और हिंसा की वकालत करने वाले लोगों को दिए जाने वाले स्पेस के बारे में एक बड़ा अंतर्निहित मुद्दा है। जयशंकर की ओर से कैनेडा को लेकर यह तीखी प्रतिक्रिया तब आई जब कैनेडा में खालिस्तानियों की ओर से निकाली गई झांकी का वीडियो सामने आया।
वीडियो तीन जून का बताया जा रहा है, जिसमें खालिस्तानी समर्थक पूर्व पीएम इंदिरा गांधी की हत्या की थीम पर आधारित झांकी निकालते हुए नजर आ रहे हैं। जिसमें सेना की वर्दी में दो सिख बॉडीगार्ड इंदिरा गांधी पर गोली बरसाते दिख रहे हैं। यह झांकी छह जून को ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी से ठीक पहले निकाली गई थी।
गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों में कैनेडा में खालिस्तानी गतिविधियों में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिली है।
पंजाब में लोग इस घटना से चकित हैं। उन्होंने कहा कि ब्रैम्पटन में एक परेड में इंदिरा गांधी की हत्या की झांकी को शामिल करने पर कड़ी आपत्ति जताने के लिए भारत को कैनेडा के उच्चायुक्त को तलब करना चाहिए। उन्होंने सवाल किया, क्या यह कैनेडा की इंडो-पैसिफिक रणनीति में मदद करता है?
खुफिया एजेंसियों का मानना था कि यह अमृतसर में भारतीय सेना के ‘ऑपरेशन ब्लूस्टार’ की ३९वीं वर्षगांठ से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है, जो १ से ८ जून, १९८४ के बीच किया गया था, जिसमें कई लोगों की जान चली गई थी और अमृतसर में स्वर्ण मंदिर और इसके परिसर को क्षतिग्रस्त कर दिया गया था।
‘ऑपरेशन ब्लूस्टार’ जरनैल सिंह भिंडरावाले के नेतृत्व में स्वर्ण मंदिर परिसर में छिपे उग्रवादियों को बाहर निकालने के लिए किया गया था। यह सैन्य कार्रवाई तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के आदेश पर की गई थी। इसका बदला लेने के लिए दो सिख सुरक्षा गार्डो ने स्टेनगन से गोलियां चलाकर इंदिरा गांधी की जान ले ली थी।
इससे पहले, ब्रैम्पटन प्रांत में एक हिंदू मंदिर को ‘भारत-विरोधी’ नारे लिखकर तोड़फोड़ करने का प्रयास किया गया था, जिससे स्थानीय प्रवासी भारतीय समुदाय सदमे में है। टोरंटो में भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने गौरी शंकर मंदिर पर हमले की निंदा करते हुए एक बयान जारी किया था।
भारत ने कैनेडा के उच्चायुक्त को हाल के दिनों में कैनेडा में भारतीय राजनयिक मिशनों के खिलाफ खालिस्तानी चरमपंथी तत्वों द्वारा कार्रवाई के बारे में अपनी चिंताओं से अवगत कराने के लिए तलब किया था।
लेकिन भारत की चिंताओं और लगातार जताए जा रहे विरोध के बावजूद कैनेडा सरकार और प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो सहित किसी भी प्रमुख कैनेडियन नेता का इस मामले में कोई सकारात्मक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में भारत के विदेश मंत्री जयशंकर द्वारा कही गई बात की पुष्टि हो जा रही है।
जस्टिन ट्रूडो को इस मामले में इस कदर लापरवाही बरतते देख यहां रह रहा प्रवासी भारतीय समुदाय सशंकित तथा चिंतित है।

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